देश के सभी शीर्ष पद अब भाजपा के पास

Rajasthan Khabre | Updated : Thursday, 10 Aug 2017 03:45:39
All the top posts of the country are now with the BJP

उपराष्ट्रपति पद पर वेंकैया नायडू के निर्वाचन के साथ ही सभी शीर्ष निर्वाचित पदों पर अब भाजपा नेता आसीन हो गए हैं। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष पद पर भाजपा काबिज हो गई है। संसदीय इतिहास में भाजपा ने अब पूरी तरह से कांग्रेस की जगह ले ली है। तीन साल पहले लोकसभा चुनाव में स्पष्ट बहुमत हासिल करने के बाद भाजपा ने चार दिन पहले राज्यसभा में कांग्रेस को हटाकर सबसे बड़ी पार्टी का तमगा भी हासिल किया।

साल 2014 से 2017 के बीच भाजपा ने जबरदस्त राजनीतिक सफलता हासिल की है। उसकी राज्य सरकारों की संख्या भी इस दौरान बढक़र 18 राज्यों तक पहुंच गई है, जहां उसके अपने मुख्यमंत्री 13 राज्यों में है और पांच में वह गठबंधन सरकार में शामिल है।

 खास बात यह है कि इन तीन सालों में कांग्रेस को लगातार झटके लगे है। उसने पहले लोकसभा चुनाव में सरकार गंवाई और उसके बाद इस साल हुए राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनाव में भी उसे हार का सामना करना पड़ा। राज्यसभा के इतिहास में तो वह पहली बार सबसे बड़ी पार्टी के रूप में पहुंची है।

हालांकि केंद्र में सत्ता में तो भाजपा पहले भी रही है, लोकसभा में अपना स्पष्ट बहुमत, सभी शीर्ष निर्वाचित संवैधानिक पदों पर पहुंचना और उससे भी ज्यादा राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनना बड़ी उपलब्धि है। इसमें उत्तर प्रदेश की बड़ी जीत शामिल है। राज्यसभा के लिए राज्यों का जीतना जरूरी होता है और यह भाजपा के देशव्यापी विस्तार को स्पष्ट करता है। उच्च सदन राज्यसभा में भाजपा को सबसे बड़ी पार्टी बनाने का श्रेय मध्यप्रदेश से उपचुनाव में जीती संपत्तियां उईके को मिला है।

राज्यसभा में भाजपा की ताकत में अगली साल और बढ़ोतरी होगी। आगामी विधानसभा चुनावों में सफलता मिलने पर राजग को 2019 तक उच्च सदन में भी बहुमत हासिल हो सकता है। संगठन के स्तर पर भी भाजपा ने बड़ी छलांग लगाते हुए 11 करोड़ सदस्यों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनने का दावा भी किया है।

वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि भाजपा अपनी सफलता को आने वाले विधानसभा चुनाव में प्रचारित करेगी। यहां यह भी बता दें कि वेंकैया नायडू ने उपराष्ट्रपति चुनाव में भी पिछले 25 वर्षों का रिकार्ड तोड़ा है। पांच उपराष्ट्रपति चुनावों के बाद यह पहला मौका है, जब किसी प्रत्याशी को 500 से अधिक 516 वोट मिले है। इससे पहले 1992 के उपराष्ट्रपति चुनाव में डॉ. के.आर. नारायण को 700 वोट मिले थे। उसके बाद कोई भी 500 का आंकड़ा पार नहीं कर पाया।

 

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