जीवन का सौन्दर्य खा जाते है रुकना-रोना और रूठना

Rajasthan Khabre | Updated : Tuesday, 09 Jan 2018 11:20:08 AM
Eat the beauty of life stopping-crying and churning

जीवन का शाश्वत सत्य है चलते रहना, हंसते रहना और मिलते रहना। लेकिन अफसोस की बात है कि वो इसके ठीक विपरीत रहा है। चलना जीवन का नैसर्गिंक सौन्दर्य है हंसना जीवन का मधुरता है और मिलना सामाजिक जीवन की पहली शर्त है। लेकिन व्यक्ति है कि छोटी सी बाधा आई, छोटा सा संकट आसा कि वह ठिठक जाता है उसके कदम रूकने लगते है डिगमगाने लगते है लड़खड़ाने लगते है और वह अपने आप से कटने लगता है कि मेरी बाधा सबसे बड़ी है मेरा संकट बहुत बड़ा है, ऐसे में मैं कैसे कदम बढाऊं। और परिणाम स्वरूप वह रूकते रूकतिे एक दम रूक जाता है और ऐसा रूकना उसके प्राकृतिक जीवन की नैसर्गिंक गति प्रगति को खा जाता है और वह सबसे पीछे एकांत में अकेला घुट-घुटकर मरने को विवश हो जाता है।

 व्यक्ति के जीवन की सौम्यता को खाने वाला जो दूसरा मुख्य कारक है उसे रोना करता है, बात बात में शिकायत करना, चिड़चिड़ा होना, झिझकना आम बात हो गई है छोटी से छोटी समस्या के सामने आने पर ही यदि कोई उसका लेकर शिकायत करने लग जाये उससे मुंह मोड़ने लग जाये और उसका लेकर पूरी तरह से नकारात्मक हो जाये तो फिर उसके जीवन की सौन्दर्यता खण्ड खण्ड होने लगती है। ऐसे में जीवन का उद्देश्य ही धूमिल होने लगता हैं। 

जो जीवन को पीछे ले जाना वाला एक और मुख्य कारक है उसे रूठना कहते हैं। व्यक्ति का इस प्रकार का स्वभाव उसे औरों से या परिवार समाज से अलग कर देता है। वह भी क्या व्यक्ति जो बात बात में रूठ जाये, नाराज हो जाये किसी भी कार्यक्रम में शामिल न हो। इस प्रकार का व्यक्ति घर परिवार में सबसे अलग और अकेला पड़ जाता है उसकी अहमियत खत्म हो जाती है और उसके जीवन के आदित्य को ही सजा पैदा हो जाता है। ऐसे में व्यक्ति अपनी मूल शक्ति को ही खा जाता है।

प्रेरणा बिन्दु:-
रूकना नहीं रूकना नहीं रूकना ही जीवन हार है
चलते रहे चलते रहे चलना ही जीवन सार है
उठता रहे हर बार जब कोई कदम तो जीत है
चुपचाप से बस आपसे निर्णय ही अपना मीत है
रोना नहीं रोना नहीं रोना भीतर तक तोड़ दे
हंसते रहे सम भी रहे हंसना जहां से जोड़ दे
अंगार पर हंसते रहे नित धार पर हंसते रहे
कारवां बन जायेगा बस प्यार से हंसते रहे
रूठना नहीं रूठना नहीं रूठना अकेला छोड़ दे
बेताब मिलने को सदा जो यो रूख हवा का
बातों ही बातों में बता रूठना भी कोई बात है
बोध से अतिशोध को पीना बड़ी सौगात है।
 

 

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