सरकार नियमों में सुधार को राजी

Rajasthan Khabre | Updated : Monday, 17 Jul 2017 01:22:13
Government persuades reforms in rules

सुप्रीम  कोर्ट ने पिछले सप्ताह मंगलवार को कहा कि बिक्री के लिए मवेशियों की खरीद-फरोख्त पर प्रतिबंध लगाने संबंधी केंद्र की अधिसूचना पर मद्रास हाईकोर्ट की अंतरिम रोक बरकरार रहेगी और यह पूरे देश पर लागू होगी। प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर और न्यायमूर्ति धनंजय यशवंत चंद्रचूड की पीठ ने केंद्र सरकार के इस वक्तव्य का संज्ञान लिया कि इस मामले में विभिन्न पक्षों की तमाम आपत्तियों और सुझावों के मद्देनजर अधिसूचना पर पुनर्विचार किया जा रहा है और वह अब एक संशोधित अधिसूचना लाएगी। 

पीठ ने कहा कि मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ द्वारा दिए गए अंतरिम निर्देश प्रभावी रहेंगे और पूरे देश में इन्हें लागू किया जा रहा है। इसके साथ ही पीठ ने केंद्र की 23 मई की अधिसूचना की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली अखिल भारतीय जमीयतुला कुरैशी एक्सन समिति की याचिका का निपटारा कर दिया। यह अच्छी बात है कि केंद्र सरकार ने पशु हत्या और बिक्री पर रोक से संबंधित अधिसूचना पर अडियल रुख नहीं अपनाया। सुप्रीम कोर्ट में अटार्नी जनरल ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों से आई प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हुए सरकार उस अधिसूचना पर पुनर्विचार कर रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि जब तक ये प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक के लिए कोर्ट सारे देश में उसके अमल पर रोक लगाना चाहे तो उस पर सरकार को आपत्ति नहीं होगी। तो मद्रास हाईकोर्ट द्वारा इस पर लगाए गए रोक को सर्वोच्च न्यायालय ने सारे देश पर लागू कर दिया। 

अब केंद्र के पास इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने का मौका है। यहां यह स्पष्ट कर लेना चाहिए कि यह मुद्दा गो-रक्षा से जुड़ा नहीं है। भारत के अधिकांश राज्यों में गो-हत्या पर प्रतिबंध भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने से पहले से लगा है। सरकार कानून पर सख्ती से अमल कराए उस पर कोई एतराज नहीं हो सकता। समस्या ऐसे सवालों को राजनीतिक उद्देश्यों से भावनात्मक मुद्दा बनाना है। उपरोक्त विवादास्पद अधिसूचना के तहत गाय के साथ-साथ भैंस वंश की हत्या के लिए बिक्री पर भी रोक लगा दी गई। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर खराब असर पड़ा है।

 पशुपालन का अपना अर्थशास्त्र है। इस कारोबार में सभी धर्मों को मानने वाले लोग शामिल है। किसी भी पशु की हत्या ना हो, यह एक आदर्श स्थिति है। लेेकिन ऐसा उच्च स्तरीय जन जागरूकता और संवेदनशीलता से ही संभव है और वह भी तब जब सबको पशु कारोबार से इतर उपयुक्त आजीविका उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए प्रयास करने के बजाए कानूनी फरमान से पशु हत्या रोकने की कोशिश से समाज में प्रतिकूल स्थितियां पैदा हुई है। इसीलिए उपरोक्त अधिसूचना पर पुनर्विचार की जरूरत है। 

इसका स्वागत किया जाना चाहिए कि केंद्र सरकार इसके लिए तैयार हो गई है। उसने कोर्ट में कहा कि इन नियमों को लेकर राज्य सरकारों से कई सुझाव और आपत्तियां आई है, जिन पर विचार किया जा रहा है। सरकार फिलहाल नए नियमों को लागू नहीं कर रही है। इनमें बदलाव करने में करीब तीन महीने का वक्त लगेगा। इसके बाद दोबारा अधिसूचना जारी होगी। आशा है पुनर्विचार करते वक्त सरकार सुप्रीम कोर्ट मेें मामले को लाने वाले याचिकाकर्ता की इस दलील को ध्यान में रखेगी कि केंद्र की अधिसूचना भेदभावपूर्व और असंवैधानिक है क्योंकि यह मवेशी व्यापारियों के अधिकारों का हनन करता है।
 

 

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