जाने बॉलीवुड कैसे बदल रहा हॉलीवुड का स्टाइल

Rajasthan Khabre | Updated : Saturday, 02 Dec 2017 04:45:44 PM
How Hollywood Style Changes Bollywood

डेस्क। बॉलीवुड के सितारें अब हॉलीवुड का रूख कर रहे है..हम आपको इस आर्टिकल के जरिए यही बताएंगे कि हमारा बॉलीवुड कैसे बदल रहा हैं हॉलीवुड का स्टाइल। क्या आप को पता है कि हॉलीवुड फ़िल्म लिंकन में भारत का भी पैसा लगा था? हॉलीवुड में बॉलीवुड और भारत की नुमाइंदगी अब प्रियंका चोपड़ा से काफ़ी आगे निकल चुकी है।

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आज की तारीख़ में हॉलीवुड में कई भारतीय कलाकार काम कर रहे हैं। कुछ भारतीय कंपनियां भी हॉलीवुड में अपने पैसे लगा रही हैं, वैसे भारत की बात करें तो यहां अक्सर फ़िल्में रिलीज़ से पहले मुश्किलें झेलती हैं। विवादों की शिकार होती हैं। ताजा मामला संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती का ही है।इस फिल्म की रिलीजिंग डेट का अभी तक कुछ नहीं पता..फिल्म रिलीज भी होगी या नहीं इस पर अभी कोई पुष्टि नहीं हुई हैं। लेकिन हॉलीवुड में ऐसा कुछ मामला नहीं देखा गया हैं।

वहीं अब हम बात कर रहे है 2001 की जहां सरकार ने बॉलीवु़ड को उद्योग का दर्जा दे दिया, इसके बाद बैंक और दूसरे वित्तीय संस्थान, फ़िल्में बनाने के लिए क़र्ज़ देने लगे। आज बॉलीवुड में हॉलीवुड फ़िल्मों से ज़्यादा टिकटें बिकती हैं। बॉलीवुड फ़िल्मों की लोकप्रियता पर हॉलीवुड की हमेशा से नज़र थी। बॉलीवुड हमेशा से ही गाने-बजाने वाली फ़िल्मों के लिए मशहूर रहा है। ये इंडस्ट्री नक़ल के लिए भी बदनाम रही है, लेकिन बॉलीवुड की दिनों-दिन बढ़ती कामयाबी ने हॉलीवुड का ध्यान अपनी तरफ़ खींचना शुरू किया था।

एक दौर ऐसा भी आया कि बॉलीवुड में टिकट की फ़रोख़्त हॉलीवुड फ़िल्मों से ज़्यादा होने लगी थी। ज़ाहिर है, कारोबार के लिहाज़ से बॉलीवुड दुनिया भर में मशहूर हो रहा था। हॉलीवुड के मशहूर स्टूडियोज़ ने भी बॉलीवुड में अपने लिए मौक़ा देखा। कई हॉलीवुड कंपनियों ने भारत की कंपनियों के साथ मिलकर प्रोजेक्ट शुरू किए।

2008 तक डिज़्नी, वायाकॉम, 20th सेंचुरी फॉक्स और सोनी पिक्चर्स ने बॉलीवुड की कंपनियों के साथ मिलकर फ़िल्में बनाने पर काम शुरू कर दिया था। हॉलीवुड स्टूडियो के आने से भारतीय फ़िल्म उद्योग में इंक़िलाब सा आ गया। उनके विश्व स्तरीय तजुर्बे की मदद से बॉलीवुड में फ़िल्में बनाने का चलन भी बदला।

फ़िल्में बनाने के बजट बढ़ गए। प्रचार पर ज़ोर दिया जाने लगा। हॉलीवुड फ़िल्मों का रीमेक, चोरी से कॉपी करके के बजाय क़ानूनी तौर पर होने लगा। हॉलीवुड ने बड़ी उम्मीदों के साथ बॉलीवुड से नाता जोड़ा था, लेकिन शुरुआत अच्छी नहीं रही। 2007 में सोनी ने संजय लीला भंसाली के साथ मिलकर सांवरिया फ़िल्म बनाई थी।

ये रोमान्टिक फ़िल्म थी, जो फियोडोर दोस्तोवस्की के उपन्यास व्हाइट नाइट्स पर आधारित थी। भंसाली अपनी शानदार, भव्य फ़िल्मों के लिए जाने जाते हैं। जिनकी फ़िल्मों में सीन भव्य होते हैं। सेट विशाल होते हैं। लेकिन उनकी फ़िल्मों को बॉक्स ऑफ़िस पर कामयाबी मिलने का रिकॉर्ड मिला-जुला ही रहा है।

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डिज़्नी और सोनी की तरह वार्नर ब्रदर्स की पहली हिंदी फ़िल्म चांदनी चौक टू चाइना बॉक्स ऑफ़िस पर लुढ़क गई। ये एक एक्शन कॉमेडी फ़िल्म थी, जो 2009 में रिलीज़ हुई थी। हॉलीवुड की बड़ी कंपनियों के पास अच्छे बिज़नेस मॉडल ज़रूर थे, लेकिन ये ज़रूरी नहीं था कि वो यहां की ज़मीन पर भी कामयाब होते। हॉलीवुड के निर्माताओं ने ऊंचे ओहदों पर ऐसे लोगों को बैठाया जो क्रिएटिव लोग नहीं थे।

आज की तारीख में वार्नर ब्रदर्स ने अपनी भारतीय शाखा को बंद कर दिया है। डिज़्नी ने भी भारत में फ़िल्में बनाने का काम छोड़ दिया है। दिलचस्प बात ये है कि तमाम नाकाम फ़िल्मों के बाद 2016 में कंपनी ने दंगल जैसी बेहद कामयाब फ़िल्म भी बनाई थी। दंगल ने 30 करोड़ डॉलर से भी ज़्यादा का कारोबार करके कमाई का नया रिकॉर्ड बनाया था। ये अब तक की सबसे ज़्यादा कमाई वाली भारतीय फ़िल्म है। दंगल ने भारत से दोगुनी कमाई तो चीन में की थी। शायद ये पहली बॉलीवुड फ़िल्म थी जिसने विदेश में इतनी कमाई की।

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