भारत का राष्ट्रीय ध्वज

Rajasthan Khabre | Updated : Friday, 11 Aug 2017 09:43:52
National flag of India

भारत का राष्ट्रीय ध्वज एक राष्ट्रीय प्रतीक है जिसे क्षैतिज आयताकार में बनाया गया है। इसे तीन रंगों की मदद से सजाया गया है जिसमें गहरा केसरिया (सबसे ऊपर), सफेद( बीच में) और हरा (सबसे नीचे)। सफेद रंग के बीचों-बीच एक नीले रंग का अशोक चक्र (अर्थात कानून का चक्र) बना हुआ है जिसमें 24 तिलियाँ है। 22 जुलाई 1947 में भारत के संविधान सभा ने एक मीभटग में राष्ट्रीय ध्वज के वर्तमान स्वरुप को स्वीकार किया था। भारत के सत्ताधारियों द्वारा वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज को अधिकारिक रुप से स्वीकार किया गया था। तीन रंगों का होने के कारण इसे तिरंगा भी कहा जाता है। ये स्वराज ध्वज पर आधारित है (अर्थात भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस का ध्वज, भपगाली वेंकैया द्वारा रुपांकित)।


भारत के लोगों के लिये राष्ट्रीय ध्वज बहुत मायने रखता है। भारत के लोगों के लिये ये बेहद महत्वपूर्ण और गौरव का विषय है। भारतीय ध्वज को एक खास किस्म के कपड़े से बनाया गया है जिसे खादी कहते है (हाथ से काता हुआ जिसे महात्मा गाँधी द्वारा प्रसिद्ध किया गया)। इसके निर्माण और डिजाइन के लिये भारतीय स्टैन्डर्ड ब्यूरो जिम्मेदार होता है जबकि, खादी विकास एवं ग्रामीण उद्योग कमीशन को इसके निर्माण का अधिकार है। 2009 में राष्ट्रीय ध्वज का अकेला निर्माण कर्ता कर्नाटक खादी ग्रामोंद्योग संयुक्त्त संघ रहा है। राष्ट्रीय प्रतीक से संबंधित कानून के साथ ही भारतीय ध्वज की प्रथा (किसी दूसरे राष्ट्र या गैर राष्ट्रीय ध्वज) को भारत का राष्ट्रीय ध्वज नियमावली संचालित करता है।

 किसी भी निजी नागरिक (किसी भी राष्ट्रीय दिवस को छोडक़र) के द्वारा राष्ट्रीय ध्वज का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है। जबकि, नवीव भजदल (निजी नागरिक) के अनुरोध पर 2002 में, सुप्रिम कोर्ट के आदेशानुसार भारत की सरकार (भारत की केन्द्रीय कैबिनेट) द्वारा ध्वज के सीमित उपयोग के कानून में बदलाव किया गया। ध्वज के अतिरिक्त इस्तेमाल के लिये 2005 में इसमें दुबारा बदलाव किया गया।

भारतीय ध्वज का अर्थ और महत्व
तीन रंगों में होने की वजह से भारतीय ध्वज को तिरंगा भी कहते है। खादी के कपड़ों, बीच में चक्र और तीन रंगों का इस्तेमाल कर भारतीय ध्वज को क्षितिज के समांतर दिशा में डिजाइन किया गया है। ब्रिटीश शासन से भारतीय स्वतंत्रता के परिणाम स्वरुप 22 जुलाई 1947 को राष्ट्रीय ध्वज को स्वीकार किया गया था। इसकी लम्बाई और चौड़ाई का अनुपात क्रमश: २:३ होता है।

आजादी और राष्ट्रीयता के प्रतीक के रुप में भारतीय ध्वज को बनाया और स्वीकार किया गया। हमारे लिये भारतीय ध्वज का बहुत महत्व है। अलग-अलग विचारधारा और धर्म जैसै हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई आदि का होने के बावजूद भी ये सभी धर्मो को एक राह पर ले जाता है और हमारे लिये एकता के प्रतीक के रुप में है। इसमें मौजूद तीन रंग और अशोक चक्र का अपना अर्थ है जो इस प्रकार है:

केसरिया रंग
राष्ट्रीय ध्वज का सबसे ऊपरी भाग केसरिया रंग है; जो बलिदान का प्रतीक है राष्ट्र के प्रति हिम्मत और नि:स्वार्थ भावना को दिखाता है। ये बेहद आम और हिन्दू, बौद्ध और जैन जैसे धर्मों के लिये धार्मिक  महत्व का रंग है। केसरिया रंग विभिन्न धर्मों से संबंधित लोगों के अहंकार से मुक्ति और त्याग को इंगित करता है और लोगों को एकजुट बनाता है। केसरिया का अपना अलग महत्व है जो हमारे राजनीतिक नेतृत्व को याद दिलाता है कि उनकी ही तरह हमें भी किसी व्यक्तिगत लाभ की इच्छा के पूरे समर्पण के साथ राष्ट्र की भलाई के लिये काम करना चाहिये।

सफेद रंग
राष्ट्रीय ध्वज के बीच का भाग सफेद रंग से डिजाइन किया गया है जो राष्ट्र की शांति, शुद्धता और ईमानदारी को प्रदॢशत करता है। भारतीय दर्शन शास्त्र के मुताबिक, सफेद रंग स्वच्छता और ज्ञान को भी दर्शाता है। राष्ट्र के मार्गदर्शन के लिये सच्चाई की राह पर ये रोशनी बिखेरता है। शांति की स्थिति को कायम रखने के दौरान मुख्य राष्ट्रीय उद्देश्य की प्राप्ति के लिये देश के नेतृत्व के लिये भारतीय राजनीतिक नेताओं का ये स्मरण कराता है।

हरा रंग
तिरंगे के सबसे निचले भाग में हरा रंग है जो विश्वास, उर्वरता; खुशहाली, समृद्धि और प्रगति को इंगित करता है। भारतीय दर्शनशास्त्र के अनुसार, हरा रंग उत्सवी और दृढ़ता का रंग है जो जीवन और खुशी को दिखाता है। ये पूरे भारत की धरती पर हरियाली को दिखाता है। ये भारत के राजनीतिक नेताओं को याद दिलाता है कि उन्हें भारत की मिट्टी की बाहरी और आंतरिक दुश्मनों से सुरक्षा करनी है।
 

 

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