अगली छमाही में जीएसटी का नकारात्मक असर कम होगा

Rajasthan Khabre | Updated : Tuesday, 10 Oct 2017 02:34:04
Negative impact of GST will be reduced in the next half year

भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी दो मासिक मौद्रिक समीक्षा नीति में चालू वर्ष के लिए आर्थिक विकास की दर का अनुमान घटा दिया है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि वित्त वर्ष 2017-18 में विकास दर 7.3 फीसदी के मुकाबले 6.7 फीसदी रहेगी। इस तरह बैंक ने अनुमान आधा फीसदी कम कर दिया है। जबकि दूसरी छमाही के लिए महंगाई की दर 4.2 से बढ़ाकर 4.6 फीसदी कर दिया है। इस प्रकार देश की आर्थिक विकास दर कम होने का सिलसिला जारी रहेगा और इस वजह से रोजगार बढ़ने की संभावना कम रहेगी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने जीएसटी (वस्तु एवं सेवाकर) को अमल की वजह से आ रही दिक्कतों और मानसून सामान्य से कम रहने की वजह से अनुमान घटाया है।

 यहां यह उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने एक जुलाई से जीएसटी लागू किया है। दूसरी ओर इस साल मानसून सामान्य से 10 फीसदी कम रहा जिससे खरीफ फसल के उत्पादन में गिरावट का अनुमान है। इन दो कारणों से आरबीआई ने विकास दर का अनुमान कम कर दिया है। यहां यह बता दें कि आरबीआई ने पहले विकास दर 7.3 फीसदी रहने का अनुमान जताया था, जिसे अब घटाकर 6.7 फीसदी कर दिया है। रिजर्व बैंक ने अपनी चौथी दो मासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में कहा है कि वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही में विकास की रफ्तार कमजोर पड़ना और खरीफ फसल उत्पादन का पहला अग्रिम अनुमान कम आना आर्थिक परिदृश्य में गिरावट के शुरुआती संकेत देते हैं। केंद्रीय बैंक ने कहा कि जीएसटी के अमल का उलटा प्रभाव भी अब तक बना हुआ है, ऐसा लग रहा है।

 इससे थोड़े समय में विनिर्माण क्षेत्र के लिए संभावना अनिश्चित दिखती है। रिजर्व बैंक के अनुसार इससे निवेश गतिविधियों में और देरी हो सकती है, जो बैंकों के कारण पहले से बही खातों पर दबाव के कारण पहले से प्रभावित है। 
केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि उसने दूसरी तिमाही में विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों का सर्वे किया, जिससे ग्राहकों का भरोसा और कुल मिलाकर व्यापार आकलन कमजोर होने का पता चला। छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की ओर से की गई समीक्षा के ब्योरे के अनुसार सकारात्मक पहलू यह है कि कंपनियां तीसरी तिमाही में व्यापार माहौल सुधरने की उम्मीद कर रही है।
 इस ब्योरे को आरबीआई की वेबसाइट पर डाला गया है। दूसरी ओर आरबीआई के लिए मुद्रा स्फीति के लक्ष्य को बढ़ाकर 4.2 से 4.6 फीसदी कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के बढ़ते दाम और खरीफ फसल उत्पादन को लेकर अनिश्चितता की वजह से केंद्रीय बैंक ने यह कदम उठाया है। रिजर्व बैंक ने सरकार की उम्मीद से विपरीत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। मौजूदा छमाही में जीएसटी के नकारात्मक असर को लेकर रिजर्व बैंक ने चिंता जताई है और सरकार को आगाह किया है कि राहत पैकेज देने में काफी सतर्कता बरतनी होगी। बैंक के संकेतों से स्पष्ट है कि अर्थव्यवस्था की मौजूदा खस्ताहाली के लिए ज्यादा खर्च जिम्मेदार है। महंगाई और अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति को देखते हुए रेपो रेट में कोई बदलाव न करने का फैसला लिया गया। इसे 6 फीसदी ही रखा गया है। 

यहां यह बता दें कि खाद्य महंगाई बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा के चलते रेपो रेट में कमी की संभावना न के बराबर थी। रेपो रेट कम न होने की वजह से बैंकों की ईएमआई सस्ती नहीं होगी। बैंक के फैसले से सस्ते कर्ज के दिवाली तोहफे का इंतजार कर रहे लोगों को निराशा हाथ लगी है। केंद्रीय बैंक ने कैश रिजर्व रेशियो (सीआरआर) में भी कोई बदलाव नहीं किया है। इसे चार फीसदी ही रखा है। हालांकि समिति ने स्टैच्युअरी लिक्विडिटी रेट (एसएलआर) यानी सांविधिक नकदी अनुपात में 50 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है।

 इसे 20 से 19.5 फीसदी कर दिया है। यहां यह उल्लेखनीय है कि एसएलआर वह दर होती है, जिसके आधार पर बैंकों को एक निश्चित फीसदी फंड रिजर्व बैंक के पास जमा करना होता है। एसएलआर रेट में बदलाव से अब बैंकों को रिजर्व बैंक के पास कम धन रखना होगा। ऐसे में बैंकों को रिजर्व बैंक से मिलने वाले ब्याज में भी कटौती होगी। उन्हें अपने आय के स्त्रोतो से ही कमाई करनी होगी। रिजर्व बैंक ने स्पष्ट कर दिया है कि वह जीएसटी के क्रियान्वयन से खुश नहीं है। मौद्रिक समिति ने कहा है कि जीएसटी के लागू होने का अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा है। इसकी वजह से उत्पादन क्षेत्र की परेशानियां बढ़ी है। ऐसे में निवेश कर हो सकता है। पूंजी निवेशक पहले से ही दबाव में है। 


हालांकि बैंक ने उम्मीद जताई है कि दूसरी छमाही में नकारात्मक असर कम होगा और विकास को रफ्तार मिलेगी। इन स्थितियों में रिजर्व बैंक ने आशंका जताई है कि महंगाई अपने मौजूदा स्तर और बढ़ेगी। बैंक ने कहा है कि किसानों को कर्ज माफी देने से राजकोषीय घाटे पर असर पड़ेगा। लगता है रिजर्व बैंक की जीएसटी के क्रियान्वयन को लेकर जताई गई नाराजगी और छोटे कारोबारियों की परेशानी का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पता चलने के बाद उन्होंने तत्काल वित्त मंत्री अरुण जेटली को निर्देश दिए कि वे छोटे कारोबारियों की दिक्कतों का हल खोजे। प्रधानमंत्री ने जीएसटी को लेकर आ रही दिक्कतों के मद्देनजर कंपनी सेक्रेटरीज के एक जलसे में पिछले बुधवार को ही घोषणा कर दी थी कि जीएसटी की दिक्कतें दूर करेंगे। उन्होंने समारोह में कहा था कि पिछले दिनों आर्थिक मोर्चे पर हमारी जो आलोचना हुई है, उसे हम बुरा नहीं मानते हैं। कठोर से कठोर आलोचना को भी हम मानते हैं। उन पर भी गंभीरता से सोचकर और पूरी नम्रता के साथ देश की अर्थव्यवस्था को सवा सौ करोड़ देश वासियों की उम्मीद के हिसाब से चलाएंगे। 

प्रधानमंंत्री मोदी द्वारा जीएसटी की दिक्कतें दूर किए जाने की घोषणा के दो दिन ही जीएसटी परिषद की बैठक में छोटे और मझोले कारोबारियों को दिवाली से पहले बड़ी राहत देने का फैसला किया गया। परिषद द्वारा लिए गए फैसले से अब 90 फीसदी व्यापारियों को हर माह जीएसटी रिटर्न भरने से मुक्ति मिल गई है। इसके अलावा आम जनता को राहत देने के लिए 26 वस्तुओं का टैक्स भी घटा दिया है। अर्थव्यवस्था में गिरावट का रिजर्व बैंक द्वारा उल्लेख किए जाने और विपक्ष भाजपा के नेताओं और संघ द्वारा लोगों की परेशानी का सरकार को आभास मिलने के बाद ही राहत के कदम उठाए गए है। लोकतंत्र में जनभावनाओं का सम्मान जरूरी है।

सरकार किसी भी हो उसे लोकतंत्र में लचीला रुख अपनाना जरूरी है। मोदी का यह बड़प्पन है कि उन्होंने यह कहने में कतई हिचक नहीं दिखाई कि आर्थिक मोर्चे पर हमारी आलोचना हुई है, उसे हम बुरा नहीं मानते और पूरी नम्रता के साथ देशवासियों की उम्मीद के हिसाब से कार्य करने की बात कही। जीएसटी के क्रियान्वयन में जनता की भागीदारी से ही सफलता मिल सकती है, यह बात सरकार ने मान ली है।

 

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