आग पर पानी डालें

Rajasthan Khabre | Updated : Thursday, 11 Oct 2018 03:10:20 PM
Pour water on fire
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अभी गुजरात में जिस तरह उत्तर भारतीय कामगारों को निशाना बनाया जा रहा है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन उससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि पूरे मामले पर राजनीति हो रही है और मामले को संभालने के बजाय राजनीतिक दल एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने में जुटे हैं। यह मामला 28 सितंबर को साबरकांठा जिले में 14 महीने की एक बच्ची के साथ बलात्कार की घटना के बाद भडक़ा, जिसका आरोप बिहार के एक मजदूर पर है। उसके बाद गुजरात के पांच जिलों गांधीनगर, अहमदाबाद, पाटन, साबरकांठा और मेहसाणा में प्रदर्शन होने लगे और यूपी, बिहार और मध्य प्रदेश के लोगों को निशाना बनाया जाने लगा। 

कई जगह उन पर जानलेवा हमले किए गए, उनके पैसे छीन लिए गए और उन्हें राज्य छोडऩे की धमकी दी गई। नतीजा यह हुआ कि गुजरात के विभिन्न संगठित-असंगठित उद्यमों में कार्यरत उत्तर भारतीय गुजरात छोडक़र भागने लगे। कहा जा रहा है कि अब तक करीब बीस हजार लोग राज्य से बाहर जा चुके हैं। इस उपद्रव के पीछे कुछ भूमिका सोशल मीडिया की भी मानी जा रही है। वडोदरा के डिप्टी एसपी के अनुसार सोशल मीडिया पर एक मेसेज वायरल हुआ, ‘विस्थापित मजदूरों की वजह से राज्य के लोगों को काम नहीं मिल रहा है इसलिए इन्हें राज्य से बाहर जाना चाहिए।’ इस मेसेज के फैलते ही उत्तर भारतीयों पर हमले शुरू हो गए। 

प्रशासन ने 56 प्राथमिकियां दर्ज की हैं और हमलों में शामिल 431 लोगों को गिरफ्तार करने का दावा किया है, हालांकि शुरू में ही उसने पर्याप्त सख्ती दिखाई होती तो शायद यह नौबत ही न आती। असल भचता इस पर हो रही राजनीति को लेकर है। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस नेता अल्पेश ठाकोर के बयानों से हालात बिगड़े हैं जबकि अल्पेश का कहना है कि इस प्रकरण में उन्हें और उनके समर्थकों को बेवजह बदनाम किया जा रहा है, जबकि हमले तो बीजेपी कार्यकर्ता कर रहे हैं।

 ऐसा लगता है कि देश की दोनों बड़ी राजनीतिक पार्टियों की कोशिश जल्द ही होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में इस घटना को भुनाने की है। ऐसा कोई प्रयास गुजरात ही नहीं पूरे देश के लिए नुकसानदेह होगा। हजारों लोगों की रोजी-रोटी दांव पर लगी है, लिहाजा अभी तो आग पर पानी डालना ही सबकी प्राथमिकता होनी चाहिए। जिन लोगों ने प्रवासी मजदूरों पर हमले किए हैं उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। 

मुख्यमंत्री ने प्रवासियों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है लेकिन बात तभी बनेगी जब राज्य सरकार का पूरा अमला इस मामले में संवेदनशीलता दिखाए। देश में क्षेत्रीय भावनाएं कई बार भडक़ाई जा चुकी हैं लेकिन इनसे हर बार न सिर्फ देश का, बल्कि संबंधित राज्य का भी नुकसान हुआ है। हर विकसित राज्य की तरक्की में दूसरे राज्यों के लोगों का भी बड़ा योगदान रहा है। यही हमारे देश की खूबसूरती है। इसे संजोकर रखने में ही सबकी भलाई है। 

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