कामदार के लिए राजाजी की अनपेक्षित पेशकश-3

Rajasthan Khabre | Updated : Thursday, 11 Oct 2018 03:13:05 PM
Rajaji's unexpected offer for Kamdar- 3
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‘‘11 जुलाई। सवेरे बाबू साहब से मिलने गया, लेकिन वे, पुरोहित जी साहब, रामप्रताप जी (खूंटेटा) और प्यारेलाला जी (कासलीवाल) तोरावाटी के मामलों पर बातचीत कर रहे थे, इसलिए मुझसे फिर मिलने के लिए कहा गया। राजाजी भी मूलसिंहजी और फौजदार के साथ 11 बजे बाबूसाहब से मिलने गए।

‘‘तीसरे पहर जब मैं पुरोहित जी साहब से मिला तो उन्होंने बताया कि राजाजी ने राज की देखरेख हटाने की मांग करते हुए कहा था कि वे गुलाबचंद को कामदार के रूप में अपनी नौकरी में रखना चाहेंगे। फिर जब मैं हरिसिंहजी से मिला तो उन्होंने भी कहा कि अपनी जिन्दगी में उन्होंने पहली बार राजाजी को खेतड़ी के राजा के अनुरूप व्यवहार करते देखा है और उनके लिए यह बड़ी श्रेयस्कर बात है कि उन्होंने राज की देखरेख हट जाने पर भी आपको (ढड्ढा को) कामदार रखने की पेशकश की है। 

मैंने कहा कि यह गुरु मंत्र आपने उन्हें दिया होगा। इस पर हरिसिंहजी ने कहा कि नहीं, स्वयं राजाजी ने ही ऐसा कहा था। राजाजी को बाबूजी (अ.च. सेन) ने कहा कि गुलाबचंद की सेवाएं खेतड़ी को उधार दी गई थी और अब उसे वापस बुलाने की इसलिए सोच रहे हैं कि हमें अच्छे आदमियों की बड़ी जरूरत है। कैसा विरोधाभास है, एक तरफ तो वे (राजाजी) मेरी उपेक्षा करते हैं और मेरे विरुद्ध झूठा आरोप लगाने की सोचते हैं और दूसरी तरफ मुझे कामदार बनाए रखने की पेशकश करते हैं!! 

राजाजी ने तो यह अपने ही मतलब से कहा होगा, पर इससे बाबू साहब को मुझे कोई बेहतर ओहदा देने में सहायता मिलेगी। जो कुछ होगा, अच्छा ही होगा। शिवनारायण का मामला अभी तक तय नहीं हुआ है। आज भी बरसात नहीं हुई।’’

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