सम्मान सद्व्यवहार की नींव पर टिका होता है

Rajasthan Khabre | Updated : Thursday, 07 Jun 2018 10:56:23 AM
Respect is on the foundation of good conduct
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शरीर को चलाने के लिए आहार चाहिए
जीवन को बढ़ाने के लिए विचार चाहिए
जीवन को बनाने के लिए आचार चाहिए
लेकिन जीवन को पाने के लिए सद्व्यवहार चाहिए

सद्व्यवहार से तात्पर्य है व्यक्ति की सद्भावनाएं, व्यक्ति की संवेदनाएं, व्यक्ति की कामनाएं, व्यक्ति के विचार और व्यक्ति की भाषा जो वह बोलता है जो वह व्यक्त करता है और इन सब चीजों के मूल स्त्रोत होते हैं-माता-पिता, प्राइमरी शिक्षक, मित्र या फिर जो बच्चों के साथ अधिक समय तक रहते हैं वे। कहा जाता है कि बबूल के पेड़ के आम नहीं लगते हैं उसी प्रकार प्रदूषित माहौल में, छल-कपट के माहौल में और नफरत भरे माहौल में पलने-बढ़ने वाले बच्चे सद्व्यवहारी बन जाएं, इसकी बहुत कम संभावनाएं रहती है।

सद्व्यवहार उस पेड़ के समान है जो सर्दी-गर्मी-बरसात-आंधी-तूफान और यहां तक की पत्थर मारने पर भी अपनी शीतलता नहीं छोड़ता है, समानता नहीं छोड़ता है, देने की प्रवृति नहीं छोड़ता है, मधुरता नहीं छोड़ता है, विनम्रता नहीं छोड़ता है और एवरग्रीन रहना नहीं छोड़ता है।

यहां यह भी सत्य है कि पेड़ में ये सारे गुण गर्मी की पीड़ा सहकर आए, सर्दी की चुभन सहकर आए, बरसात-ओलों की मार-थपेड़े खाकर आए, भूख-प्यास को सहकर आए और अपने हौसले के बल से सभी मुसीबतों को धत्ता बताने के कारण आए। यही बात व्यक्ति पर भी लागू होती है जो भी व्यक्ति अभावों में पलता-बढ़ता है, उसके सामने ज्यादा चुनौतियां होती हैं, और चुनिंदा लोग जो चुनौतियों का सामना करते हैं वे ही चमत्कार करते हैं अपने सद्व्यवहार से। सद्व्यवहार के जो पोषक तत्व हैं वे परिश्रम, विनम्रता, ईमानदारी, सरलता, सच्चाई, शालीनता और मधुरता हैं।

जैसे-जैसे कोई फल बड़ा होता जाता है, उसका कड़ापन, उसका खट्टापन विनम्रता में बदलता जाता है, मधुरता में बदलता जाता है अर्थात् वह नरम और सरस हो जाता है।

यही बात व्यक्ति पर लागू होती है वह भी भौतिक सम्पदा से फूल जाता है, ऐंठा रहता है और अहंकार से भरा रहता है, लेकिन जैसे-जैसे उसे इंसानियत का महत्व मालूम पड़ता है, प्रेम और सहयोग का महत्व मालूम पड़ता है, वह भी विनम्र बनता जाता है, सरल बनता जाता है, प्रेम से भरता जाता है और सद्व्यवहारी बनता जाता है।

दुनिया बहुत सारी शक्तियों से भरी है, दुनिया बहुत सारे व्यक्तियों से भरी है लेकिन हर कोई दिल से उसी से प्रेम करेगा, उसी को चाहेगा, उसी को अच्छा बताएगा और उसी को इंसान मानेगा जिसका स्वभाव अच्छा होगा जिसका व्यवहार अच्छा होगा अर्थात् उसका जीवन अच्छा और सार्थक होगा।

आइए, हम अपने मन-वचन-कर्म से सदाचारी बनें और यदि सदाचारी हैं तो अपने सदाचार को जन-जन तक पहुंचाएं, फैलाएं और अपने सद्व्यवहार का उपहार बांटते रहें हर पल। याद रखें हमारा जीवन सद्व्यवहार पर टिका है और सद्व्यवहार से ही जाना जाएगा।

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