दृढ़ इच्छा शक्ति, मेहनत और लगन बनाते हैं सिरमौर

Rajasthan Khabre | Updated : Wednesday, 11 Oct 2017 03:17:23
Strong will, hard work and passion make Sirmaur

बात  पुरानी जरूर है लेकिन है बहुत सार्थक और प्रेरक। प्राचीन समय में एक ऋषि के आश्रम में बहुत सारे शिष्य विद्याध्ययन करते थे। उन शिष्यों में से कुछ राजकुमार थे तो कुछ निर्धन परिवारों के बच्चे भी थे। एक दिन ऋषि पेड़ के नीचे बैठकर संस्कृत का पाठ पढ़ा रहे थे। पाठ पूरा होने पर उन्होंने एक निर्धन बच्चे को पढ़ाए हुए संस्कृत के श्लोकों का अर्थ बताने के लिए कहा। लेकिन वह शिष्य उन श्लोकों को पढ़ ही नहीं पाया। और ऋषि क्रोधित होकर उस शिष्य को डंडे मारने के लिए अपने हाथ आगे बढ़ाने के लिए कहा। शिष्य ने डरते-डरते अपने हाथ ऋषि के आगे कर दिए।

 जैसे ही ऋषि ने उस शिष्य के हाथों को देखा तो वे बोले, तुम्हें तो मारना ही बिल्कुल निरर्थक है क्योंकि तुम्हारे हाथ में विद्या की तो कोई रेखा ही नहीं है, इसलिए तुम्हारा शिक्षा ग्रहण करना ही बेकार हो जाता है। वह शिष्य अपने गुरुजी के वक्तव्य से अंदर तक हिल गया, वह अपने स्थान से उठा और आश्रम के बाहर चला गया। थोड़ी ही देर में वह वापस आश्रम में आया, लेकिन उसकी हथेली में खून बह रहा था। उस ऋषि ने पूछा- तुम्हारे हाथ में यह क्या हुआ? यह घाव कैसे हो गया? शिष्य ने बड़ी गंभीरता से कहा- गुरुजी यह घाव नहीं है बल्कि विद्या की रेखा है, जिसे मैंने खुद अपनी हथेली पर बनाई है।

ऋषि ने तुरंत ही अपने शिष्य का उपचार किया और उस शिष्य की दृढ़ इच्छा शक्ति से बहुत प्रभावित हुए। उस दिन से ऋषि ने उस शिष्य पर पूरा ध्यान देना शुरू कर दिया और शिष्य भी अपने गुरुजी का पूरा प्रेम पाकर खूब परिश्रम करने लगा पूरी निष्ठा और लगन के साथ। वह दिन प्रतिदिन खूब उन्नति करने लगा और उसकी दृढ़ इच्छा शक्ति, परिश्रम और लगन ने तथा ऋषि के लगाव ने उसे संस्कृत का प्रकाण्ड विद्वान बना दिया और उस शिष्य का नाम था- पाणिनी।

जिन्होंने बड़े होकर संस्कृत का पहला व्याकरण ग्रंथ लिखा। इसलिए आइए, युवाओं यह कतई जरूरी नहीं है कि सिरमौर बनने के लिए शुरू में बहुत बड़ा काम शुरू करना है, बहुत बड़ा अनुसंधान करना है क्योंकि किसी भी बड़ी कामयाबी या योजना के लिए शुरूआत छोटी ही सही, लेकिन समय पर पूरे दृढ़ निश्चय और मेहनत लगन से होनी चाहिए। क्योंकि जिलेट ने कभी भी हवाई जहाज या कार बनाने की कोशिश नहीं की थी, बल्कि उन्होंने रोज काम में आने वाली चीज सेफ्टी रेजन बनाने की सोची लेकिन उसमें दिलोजान से लगे और कामयाब हुए।

प्रेरणा बिन्दु:- 
कुछ लोग हैं कि कश्ती संग किनारे रह गए
कुछ लोग हैं कि कश्ती को किनारे ले गए।

 

Copyright @ 2017 Rajasthankhabre, Jaipur. All Right Reserved.