दीपावली के दूसरे दिन श्रीनाथजी के मंदिर में ऐसे मनाया जाता है खेंखरा पर्व

Rajasthan Khabre | Updated : Tuesday, 06 Nov 2018 01:52:26 PM
Thousands of devotees are the center of attraction of Shrinathji's Khakhkra festival

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इंटरनेट डेस्क। दीपावली का त्यौहार देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग मां लक्ष्मी जी की पूजा अर्चना करते है और आने वाले वर्ष में सुख समृद्धि की कामना करते है। वैसे दीपावली के दूसरे दिन गोवर्धन पर्व मनाया जाता है और इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। वैसे देश में इस दिन को मनाने के अलग अलग तरीके है और लोग उसे अपने प्रदेश और अपने धर्म के अनुसार मानते है।


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ऐसे ही राजस्थान में राजसमंद जिले के श्रीनाथद्वारा में भगवान श्रीनाथजी के मंदिर में भी इस पर्व को खेंखरा पर्व के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व श्रीनाथजी के मंदिर में आठ नवम्बर को मनाया जायेगा।
इस पर्व के दिन हजारों लोग एकत्र होते है और इसकी तैयारी के लिये ग्वालबाल दशहरे के बाद से गौशाला में गायों के श्रृंगार में जुट जाते हैं। इसके तहत मयूर पंख से गायों के लिए टीपरा, सिरपेंच, लटकन सहित विविध प्रकार की श्रृंगार सामग्री बनाते हैं।

ग्वालबाल दीपावली के दिन इन गायों को नाथूवास स्थित गौशाला से भगवान श्रीनाथजी के दर्शन के लिए सजा धजा कर लाते है। शाम को इन गायों का मंदिर में प्रवेश कराया जाता है और फिर शुरू होती है गौक्रीडा। इस गौक्रीडा कार्यक्रम में ग्वाले किलकारी मारते और तब ही गाय ग्वाला को मारने दौड़ती है और दो ही कदम आगे बढकर वह रुक जाती हैं और ग्वाला बच जाता हैं।

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खेंखरे के दिन गायों का यह कार्यक्रम चलता है। खेंखरे के दिन रात को अन्नकूट लूट का आयोजन भी यहां परम्परागत रुप से होता है। हजारों की संख्या में लोग प्रसादी ग्रहण करने को आते है। 
 

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