अयोध्या विवाद: जाने राम मंदिर और बाबरी मस्जिद मामले में अब तक क्या क्या हुआ

Rajasthan Khabre | Updated : Thursday, 10 Jan 2019 02:33:11 PM
Ayodhya Land Dispute What has happened in Ram Temple and Babri Masjid till now

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इंटरनेट डेस्क। 6 दिसंबर 1992 को यानी के 26 वर्ष पहले अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विवादित ढांचे का विध्वंस हुआ था और तभी से देश में मस्जिद और मंदिर को लेकर विवाद चला आ रहा है। आए दिन देश के कई संगठन अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की मांग कर रहे है। हालांकि आज तक विवादित जगह पर राम मंदिर का निर्माण नहीं हो पाया है। हर बार चुनाव के मौके पर भाजपा राम मंदिर का मुद्दा तो उठाती है लेकिन निर्माण नहीं हो पाता है। वैसे राम मंदिर और बाबरी मस्जिद का विवाद वर्षों से चला आ रहा है।


इस मामले में आज यानी के 10 जनवरी 2019 को कोर्ट में एक बार फिर सुनवाई हुई लेकिन फिर वहीं पहले की तरह सुनवाई के लिए नई तारीख का ऐलान कर दिया गया। इधर इस मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ से न्यायाधीश उदय उमेश ललित ने अपने आप को अलग कर लिया।

वैसे इस मामले में अब तक क्या क्या हुआ उस पर नजर डालते है।

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वर्ष 1528ः इतिहासकारों और जानकारों की माने तो विवाद की शुरूआत 18वीं सदी में हुई थी। साल 1528-29 में यहां शासक बाबर ने एक मस्जिद बनवाई, जिसे बाबरी मस्जिद के नाम से जाना गया। मान्यताओं की माने तो इसी जगह भगवान राम का जन्म हुआ था और राम मंदिर को तुड़वाकर मस्जिद बनाई गई।

वर्ष 1859ः इस समय अंग्रेजों का शासन था और उन्होंने विवादित स्थल का बंटवारा कर दिया ताकि अलग-अलग जगहों पर हिंदू-मस्लिम अपनी-अपनी प्रार्थना कर सकें।

वर्ष 1885ः मामला पहली बार अदालत पहुंचा। महंत रघुबर दास ने फैजाबाद कोर्ट में बाबरी मस्जिद परिसर में राम मंदिर निर्माण की इजाजत मांगी लेकिन कोर्ट ने इंकार कर दिया।

वर्ष 1949ः कहा जाता है की हिंदूओं ने मस्जिद की जमीन पर राम की मूर्ति स्थापित कर दी और तक से ही यहा भगवान की पूजा शुरू हो गई और नमाज बंद हो गई।

वर्ष 1950ः मस्जिद में हिंदुओं के लिए पूजा जारी रखने के लिए एक याचिका लगाई गई और उसी समय मस्जिद को ‘ढांचा’ के रूप में संबोधित किया गया।

वर्ष 1959ः निर्मोही अखाड़ा ने विवादित स्थल के हस्तांतरण के लिए कोर्ट में मुकदमा किया।

वर्ष 1961ः उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने भी बाबरी मस्जिद पर मालिकाना हक के लिए मुकदमा किया।

वर्ष 1984ः विहिप ने बाबरी मस्जिद का ताला खोलने और मंदिर बनवाने के लिए अभियान शुरू किया।

वर्ष 1986ः स्थानीय कोर्ट की और से बड़ा फैसला आया और विवादित स्थल पर हिंदुओं को पूजा की इजाजत मिली। नाराज मुस्लिम समुदाय ने बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी बनाई।

वर्ष 1989ः भाजपा ने इस मामले में विहिप को समर्थन दिया।

वर्ष 1989ः नवंबर महीने में लोकसभा चुनाव के पहले तत्कालीन पीएम राजीव गांधी ने बाबरी मस्जिद के नजदीक शिलान्यास की इजाजत दी।

वर्ष 1990ः बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने 25 सिंतबर को गुजरात के सोमनाथ से यूपी के अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली। हजारों कार सेवक अयोध्या आए और इस यात्रा के बाद साम्प्रदायिक फैले।

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वर्ष 1992ः  6 दिसंबर का दिन हजारों कार सेवकों ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहा दिया और अस्थायी राम मंदिर बना दिया। दंगे फेले और हजारों लोग मारे गए।

वर्ष 1992ः मस्जिद की तोड़-फोड़ की जांच के लिए लिब्रहान आयोग बनाया गया।

वर्ष 1997- इस दिन बड़ा फैसला आया और विशेष अदालत ने बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले में 49 लोगों को दोषी करार दिया। इसमें बीजेपी के कुछ नेता भी शामिल रहे। 

वर्ष 2002ः हाईकोर्ट ने अयोध्या के विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर सुनवाई शुरू की।

वर्ष 2003ः हाइकोर्ट के निर्देश के बाद इस जगह पर खुदाई की गई तो मस्जिद के नीचे मंदिर के अवशेष मिले।

वर्ष 2009ः लिब्रहान आयोग ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी।

वर्ष 2010ः इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस दिन ऐतिहासिक फैसला सुनाया और विवादित जमीन को तीन टुकड़ों में बांट दिया। एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और तीसरा निर्मोही अखाड़े को दिया गया।

वर्ष 2011ः सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जो फैसला सुनाया उस पर फिर रोक लगा दी।

वर्ष 2017ः सुप्रीम कोर्ट ने कहा की लोगों को आपस में बैठकर इस मसले को सुलझाना चाहिए।

वर्ष 2017ः अप्रेल में सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में बीजेपी और आरएसएस के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक केस चलाने का आदेश दिया।

वर्ष 2017ः नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के वर्ष 2010 के फैसले को चुनौती दी।

वर्ष 2018ः  सुप्रीम कोर्ट ने सिविल अपील पर सुनवाई शुरू की।

वर्ष 2018ः अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला आरक्षित रखा।

वर्ष 2018ः अक्टूबर महीने में ही सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनाई के लिए इंकार किया और केस जनवरी 2019 तक के लिए टाल दिया।

वर्ष 2018ः नवंबर महीने में विहिप ने धर्म सभा का आयोजन किया और मंदिर बनाने का संक्लप जताया।

वर्ष 2019ः 10 जनवरी को कोर्ट ने सुनवाई शुरू की लेकिन सुनवाई के लिए इसी महीने की 29 जनवरी अगली तारीख मुकर्रर कर दी गई।

वर्ष 2019ः 10 जनवरी को ही इस मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ से न्यायाधीश उदय उमेश ललित ने अपने आप को अलग कर लिया।

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