देश हित में फायदेमंद साबित हो सकते है एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव

Rajasthan Khabre | Updated : Monday, 09 Jul 2018 01:25:39 PM
Lok Sabha and assembly election benefits of being together
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इंटरनेट डेस्क। लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने को लेकर कई बार बातें हो चुकी है। देश की कई राजनीतिक पार्टियां है जो इससे सहमत भी है तो कई इसके विरोध में भी है। 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद से ही यह बात सामने आई थी और देश के प्रधानमंत्री मोदी ने यह बात कही थी की देश में अगर एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव होते है तो यह देश के लिए फायदेमंद होंगेे। इसके लिए पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी कहा थी अगर देश में एक साथ ही चुनाव हो जाते है तो इससे बढ़िया कुछ भी नहीं हो सकता है। 

इसके बाद देश के नए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी कहा की चुनाव एक साथ होने के कई फायदे है। बार बार चुनाव होने से देश की विकास दर में रूकावट पैदा होती है और इसका खामियाजा सबकों भुगतना पड़ता है। 

एक साथ चुनाव के फायदेः

एक साथ चुनाव कराने से देश को जो आर्थिक और समय का नुकसान होता है उसकी बचत होगी। देश में हर वर्ष दो से तीन राज्यों में चुनाव होते है और हर चुनाव में सुरक्षा का मुद्दा सबसे बड़ा होता है और इसके लिए बड़ी धन राशि खर्च करनी पड़ती है इसकी बचत होगी। 

सरकारी कर्मचारियों को हर बार चुनावों को लेकर जो भाग दौड़ करनी पड़ती है वो नहीं होगी। जिससे सरकारी आॅफिसों के काम काज नहीं रूक सकेंगे। सरकार को हर साल चुनावों को लेकर तैयारिंया नहीं करनी पड़ेगी और सारा ध्यान एजेंडों पर लगा पाएगी। 

सरकार को तो इससे आर्थिक फायदा होगा ही साथ ही राजनीतिक दलों का भी एक साथ चुनाव होने से फायदा होगा। बार बार होने वाले चुनावों से हर बार आचार संहिता लगती है जिससे देश और प्रदेश की सरकारे बंध जाती है और समय पर लिए जाने वाले निर्णय रूके रह जाते है।

विपक्ष क्या कहता हैः

एक साथ चुनावों के मुद्दों पर कई बार विपक्ष भी अपनी राय दे चुका है विपक्ष का कहना है की सभी चुनाव एक साथ कराना व्यावहारिक नहीं होगा। सरकार के पास इतनी मशीनरी भी नहीं है और चुनाव कराना संभव भी नहीं है, मशीनरी के कमी के कारण चुनावों में गफलत होने का डर बना रहेगा। साथ ही संवैधानिक दिक्कतों का सामना भी करना पड़ेगा।

चुनाव आयोग जता चुका है सहमतिः 

चुनाव आयोग लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाने को लेकर अपनी और से सहमति जता चुका है। आयोग का कहना है की अगर सभी राजनीतिक दल एक साथ हो तो यह संभव है, लेकिन इसमे थोड़ा समय लगेगा और एक साथ चुनाव के लिए संविधान में बदलाव करना पड़ेगा।

पहले एक साथ ही होते थे चुनावः 

देश के स्वतंत्र होने के बाद एक साथ ही चुनाव होते है थे। 1952 से 1967 तक यह सिलसिला चला भी लेकिन बीच में कई राज्यों में सरकारें गिर जाने के कारण ऐसी स्थितियां पैदा हो गई चुनाव फिर अलग अलग होने लग गए।

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