बिहार की बेटी ने बीमार पिता को 1200 Km साइकिल चलाकर पहुंचाया घर, देखें तस्वीरें

Rajasthan Khabre | Updated : Monday, 01 Jun 2020 01:52:52 PM
Bihar's daughter drives her sick father home by cycling 1200 Km, see photos

नई दिल्ली। आप सभी को पता है भारतीय समाज में प्राचीन काल से ही बेटियों को बहुत मान-सम्मान दिया जाता रहा है।  बेटियां पिता का मान-सम्मान होती हैं तो वहीं बेटी के लिए एक पिता उसकी जिंदगी के सबसे पहले  हीरो होते हैं। कोरोना वायरस संक्रमण के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दे की कोरोना वायरस संक्रमण का संक्रमित व्यक्ति के छूने, छींकने या खांसने से फैल सकता है। हल्का बुखार, खांसी, भारीपन आदि इस वायरस के लक्षण है। 

 


 भारत में भी कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या डेढ़ लाख के पार चली गई है। इसकी दवा अब तक उपलब्ध नहीं है। जिसको लेकर देशभर में लॉक डाउन चल रहा है। जिसके कारन मजदुर अपने गांव जा रहे है। एक 15 साल की बेटी घायल पिता को अपनी पुरानी सी साइकिल पर बैठाकर दिल्ली से दरभंगा पहुंच गई। पिता मोहन पासवान का कहना है कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है तो वहीं बेटी का कहना है कि मैं अपने पिता की बेटी नहीं, बेटा हूं। 


आपको बता दे की बिहार के एक छोटे से गांव की बेटी दरभंगा के ज्योति कुमारी की हौसले की चर्चा आज हर जगह हो रही है। देश ही नहीं विदेश में भी, यहां तक की अब अमेरिका भी पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप ने बिहार के दरभंगा जिले के सिरहुल्ली गांव की 15 साल की लड़की ज्योति के संघर्ष को सराहा की है। सिरहुल्ली गांव की ज्योति लॉकडाउन में पिता को लेकर साइकिल से गुरुग्राम से दरभंगा पहुंच गई। 12 सौ किमी के इस संघर्षपूर्ण सफर को उसने जिस हौसले के साथ पूरा किया है वो सराहनीय है। 


आपकी जानकारी के लिए बता दे की ज्योति के पिता गुरुग्राम में रहकर ऑटो चलाते थे। सड़क दुर्घटना में उनके घायल होने के बाद वह 30 जनवरी को मां के साथ गुरुग्राम गई थी। मां के गांव आने के बाद वह पिता की सेवा में लगी रही। इसी बीच मार्च के तीसरे सप्ताह में लॉकडाउन हो गया। कुछ दिनों में जमा-पूंजी खर्च हो गई तो कोई रास्ता न देख ज्योति ने साइकिल से घर लौटने का फैसला किया। पिता ने ज्योति की जिद पर पांच सौ में पुरानी साइकिल खरीदी। दिव्यांग पिता को उस पर बैठाकर 10 मई की रात गुरुग्राम से घर के लिए निकली। आठ दिन में घर पहुंची तो आस-पड़ोस के लोग दंग रह गए थे। 


 
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