Land Owners के लिए मुआवजा सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य है: अदालत

Rajasthan Khabre | Updated : Saturday, 21 Nov 2020 03:49:29 PM
It is the duty of the government to ensure compensation for landowners: court

मुंबई। बंबई उच्च न्यायालय ने कहा है कि जब सरकार किसी सार्वजनिक कार्य के लिए भूमि का अधिग्रहण करने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करती है, तो यह सुनिश्चित करना भी उसका दायित्व है कि भूमालिकों को उसका मुआवजा मिले।

 

न्यायमूर्ति मिलिद जाधव की एकल पीठ ने सक्षम प्राधिकारी द्बारा तय की गई मुआवजा राशि को चुनौती देने वाली भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की याचिका 17 नवंबर को खारिज कर दी।
अदालत ने एनएचएआई को निर्देश दिया कि वह उन दो महिलाओं को मुआवजे की राशि दे, जिनकी जमीन का सार्वजनिक कार्यों के लिए अधिग्रहण किया गया है।

एनएचएआई ने उपायुक्त (भूमि अधिग्रहण) नासिक के पांच जनवरी, 2०17 के आदेश को खारिज किए जाने का अनुरोध किया था। इस आदेश के तहत, नासिक के राहुद गांव में 3,००० वर्ग मीटर जमीन की मालिक मालतीबाई पवार और 1,9०० वर्ग मीटर जमीन की मालिक उज्ज्वला थोराट को मुआवजा देने को कहा गया था। एनएचएआई ने राष्ट्रीय राजमार्ग तीन को चौड़ा करने के मकसद से उनकी भूमि के अधिग्रहण का प्रस्ताव रखा था।

एनएचएआई को 2,7०० रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर पर मुआवजा देने का आदेश दिया गया था, जिसे बाद में कम करके 2,2०० रुपए प्रति वर्ग मीटर कर दिया गया था। नासिक सत्र अदालत ने अक्टूबर 2०18 में इस राशि को बरकरार रखा था, जिसके बाद एनएचएआई ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

न्यायमूर्ति जाधव ने कहा कि सरकार जब भूमालिकों की इच्छा के विरुद्ध सार्वजनिक कार्यों के लिए भूमि अधिग्रहण के अपने अधिकार का इस्तेमाल करती है, तो यह सुनिश्चित करना सरकारी निकाय का दायित्व बनता है कि जिस व्यक्ति की जमीन का अधिग्रहण किया गया उसे कानूनी प्राधिकारी द्बारा घोषित मुआवजा राशि दी जाए।

पीठ ने याचिका खारिज कर दी, लेकिन इसके क्रियान्वयन पर 12 जनवरी 2०21 तक रोक लगा दी, ताकि एचएचएआई को अदालत के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने का समय मिल सके। (एजेंसी)   


 
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