अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिए ये तीन मंत्र

Rajasthan Khabre | Updated : Wednesday, 15 Jul 2020 02:53:53 PM
Now Prime Minister Narendra Modi gave these three mantras

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि कोरोना वायरस महामारी के दौर में खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए लोगों को अपने कौशल के उन्नयन का कोई भी मौका नहीं चूकना चाहिए।

 

उन्होंने इसके लिए तीन मंत्र दिए - कौशल (स्किल), पुन: कौशल अर्जित करना (री-स्किल) और कौशल उन्नयन (अपस्किल)। प्रधानमंत्री ने 'विश्व युवा कौशल दिवस’ के अवसर पर आयोजित ''कौशल भारत’’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कौशल किसी भी समय अर्जित किया जा सकता है, समय के साथ यह बेहतर होता है और आपको दूसरों से अलग बनाता है।

''स्किल इंडिया मिशन’’ के पांच साल पूरा होने के अवसर पर आयोजित इस डिजिटल कार्यक्रम में मोदी ने यह भी कहा कि तेजी से बदलती हुई आज की दुनिया में अनेक सेक्टरों में लाखों स्किल्ड लोगों की जरूरत है, विशेषकर स्वास्थ्य सेवाओं में तो बहुत बड़ी संभावना बन रही है।उन्होंने कहा, ''कोरोना (वायरस) के इस संकट ने कार्य संस्कृति के साथ ही 'नेचर ऑफ जॉब’ (काम की प्रकृति) को भी बदल कर के रख दिया है और बदलती हुई नित्य नूतन तकनीक ने भी उस पर प्रभाव पैदा किया है। कई लोग मुझसे पूछते हैं कि आज के दौर में बिजनेस और बाजार इतनी तेजी से बदलते हैं कि समझ ही नहीं आता कि प्रासंगिक कैसे रहा जाए।’’

उन्होंने कहा कि कोरोना के समय में तो यह सवाल और भी अहम हो गया है। मोदी ने कहा, ''प्रांसगिक रहने का मंत्र है स्किल, री-स्किल और अपस्किल। स्किल का अर्थ है, आप कोई नया हुनर सीखें। उसमें वैल्यू एडिशन करके कुछ नया सीखते रहने का मतलब है री-स्किल। इसका और विस्तार करना हो गया अपस्किल। स्किल, री-स्किल और अपस्किल का ये मंत्र जानना, समझना और इसका पालन करना हम सभी के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण है।’’

उन्होंने कहा कि कौशल किसी भी समय अर्जित किया जा सकता है, समय के साथ यह बेहतर होता है और आपको दूसरों से अलग बनाता है।
उन्होंने कहा, ''स्किल आपकी ऐसी संपत्ति है जो कोई आपसे छीन नहीं सकता। यह आत्मनिर्भर भी बनाता है। यह न सिर्फ आपको रोजगार-योग्य बनाता है बल्कि आपको स्वरोजगार के योग्य भी बनाता है। स्किल की ये ताकत जो है, इंसान को कहां से कहां पहुंचा सकती है।’’

प्रधानमंत्री ने इस मंत्र को हमेशा याद रखने की अपील करते हुए कहा कि कोई कितना ही पढ़ा-लिखा क्यों ना हों, कितनी ही डिग्रियां क्यों ना हो, फिर भी निरंतर स्किल भी बढ़ाते रहना चाहिए। उन्होंने कहा, ''लगातार नई-नई स्किल के लिए अपने आप को तैयार करना चाहिए। जिदगी जीने का आनंद आएगा। जिदगी के नए अवसरों को पाने का आनंद आएगा। मुझे विश्वास है कि आप अपने हाथों की ताक़त, अपनी उंगलियों की ताक़त, अपने दिल दिमाग की ताकत, एक हुनर के द्बारा पनपाएंगे और बढ़ाएंगे। खुद की प्रगति करेंगे, देश की भी प्रगति करेंगे।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक सफल व्यक्ति की बहुत बड़ी निशानी होती है कि वह अपने कौशल को बढ़ाने का कोई भी मौका जाने ना दे और नया मौका ढूंढता रहे।
उन्होंने कहा, ''कौशल के प्रति अगर आप में आकर्षण नहीं है, कुछ नया सीखने की ललक नहीं है, तो जीवन ठहर जाता है। एक रुकावट आ जाती है। एक प्रकार से वह व्यक्ति अपने व्यक्तित्व को बोझ बना देता है। खुद के लिए ही नहीं अपने स्वजनों के लिए भी बोझ बन जाता है।’’

उन्होंने कहा कि कौशल के प्रति आकर्षण जीने की ताकत देता है, जीने का उत्साह देता है। उन्होंने कहा, ''यह सिर्फ रोजी-रोटी और पैसे कमाने का जरिया नहीं है। जीने के लिए कौशल हमारी प्रेरणा बनता है। यह हमें ऊर्ज़ा देने का काम करती है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि तेजी से बदलती हुई आज की दुनिया में अनेक सेक्टरों में लाखों स्किल्ड लोगों की जरूरत है, विशेषकर स्वास्थ्य सेवाओं में तो बहुत बड़ी संभावनाएं बन रही हैं।

उन्होंने कहा, ''यही समझते हुए अब कौशल विकास मंत्रालय ने दुनिया भर में बन रहे इन अवसरों की मैपिग शुरू की है। कोशिश यही है कि भारत के युवा को अन्य देशों की जरूरतों के बारे में, उसके संबंध में भी सही और सटीक जानकारी मिल सके।’’ उन्होंने कहा कि किस देश में स्वास्थ्य सेवाओं में नए द्बार खुल रहे हैं, किस देश में सर्विस सेक्टर में मांग बन रही है, इससे जुड़ी जानकारी अब तेजी से भारत के युवाओं को मिल सकेगी।

मर्चेंट नेवी का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत समेत पूरी दुनिया को नाविकों की बहुत जरूरत है।
उन्होंने कहा, ''हमारी तो साढेè सात हजार किलोमीटर से लंबी कोस्ट लाइन है। बड़ी संख्या में हमारा युवा समुद्र और तटीय परिस्थितियों से परिचित हैं। अगर इस क्षेत्र में स्किल को बढ़ाने पर काम किया जाए तो दुनिया भर को हम लाखों विशेषज्ञ नाविक दे सकते हैं और अपने देश की कोस्टल इकोनॉमी को भी मजबूत कर सकते हैं।’’
कोरोना के संक्रमण को रोकने के मकसद से देश भर में लागू किए गए लॉकडाउन के दौरान प्रवासी श्रमिकों ने अपने गृह क्षेत्रों का रूख किया।

इसका जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ''आपने देखा होगा कि कैसे गांव पहुंचे लोगों ने गांव का कायाकल्प करना शुरू कर दिया है। कोई स्कूल को पेंट कर रहा है, तो कोई नए डिजाइन के घर बनवा रहा है। छोटी-बड़ी हर तरह की ऐसी ही स्किल आत्मनिर्भर भारत की भी बहुत बड़ी शक्ति बनेगी।’’ नॉलेज और स्किल के बीच के फर्क को समझाते हुए मोदी ने कहा कि शासन से लेकर समाज के हर स्तर पर इसे समझना बहुत जरूरी है।

उन्होंने कहा, ''इसी अंतर को समझते हुए आज भारत में काम हो रहा है। नॉलेज के साथ युवाओं को स्किल भी मिले, इस उद्देश्य के साथ देशभर में सैकड़ों प्रधानमंत्री कौशल विकास केंद्र खोले गए। आईटीआई की संख्या बढ़ाई गई, उनमें लाखों नई सीट जोड़ी गईं। इस दौरान पांच करोड़ से ज्यादा लोगों का कौशल विकास किया जा चुका है और यह अभियान निरंतर जारी है।’’ 


 
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