Pitru Paksha 2022: पिंडदान और तर्पण के लिए प्रसिद्ध हैं भारत के ये दस स्थान, जानें

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इंटरनेट डेस्क। पितृपक्ष की शुरुआत 10 सितंबर 2022 से हो चुकी है। पितृपक्ष का हिन्दू धर्म में बहुत ही महत्व है। इस दौरान लोग पितरों की आत्मा की मुक्ति के लिए पिंडदान, तर्पण आदि कार्य करते हैं।  हिन्दू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक, पिंडदान और तर्पण सिद्ध और धार्मिक स्थलों पर करने से पितर खुश होते हैं। ऐसा करने से व्यक्ति को उचित फल की प्राप्त होती है। 

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आज हम आपको देश के कुछ ऐसे कई सिद्ध या प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के बारें में जानकारी देने जा रहे हैं जहां लोग श्राद्ध कर्म कर सकते हैं। राजस्थान में पुष्कर और लौहनगर में लोग पितरों की मुक्ति के लिए श्राद्ध कर्म करते हैं। बताया जाता है लौहनगर के सूरजकुंड में पांडवों ने अपने पितरों की मुक्ति के लिए श्राद्ध कर्म किया था।

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इनके अलावा  उत्तर प्रदेश में मोक्ष नगरी से प्रख्यात काशी, बिहार के गया शहर, उत्तराखंड में स्थित हरिद्वार, कर्नाटक में मौजूद लक्ष्मण बाण, महाराष्ट्र में स्थित नाशिक शहर, उत्तरप्रदेश में मौजूद प्रयागराज में त्रिवेणी संगम,  उत्तराखंड में ब्रह्मकपाल और गुजरात में स्थित पिंडारक में भी पिंडदान किया जा सकता है।