Rajasthan: प्रदेश की राजनीति में गरमा रहा परिवारवाद का मुद्दा, पक्ष और विपक्ष आमने सामने

इंटरनेट डेस्क। राजस्थान कीद राजनीति में आज कल बेटों की राजनीति में एंट्री को लेकर विवाद छिड़ा हुआ हैं और विवाद इस स्तर पर पहुंच गया हैं की नेता एक दूसरे पर निशाना साधने से नहीं चूक रहे है। एक तरफ कांग्रेस से अशोक गहलोत हैं तो दूसरी तरह से भाजपा के कई नेता मैदान में उतर चुके हैं। पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने अपने एक बयान में सरकार के मंत्रियों को नसीहत देते हुए कहा था कि वह अपने बेटों को सरकारी काम काज से दूर रखे, क्योंकि इससे सरकार की बदनामी होती है। इस बयान से प्रदेश में सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने है।

मदन राठौड़ ने दिया जवाब
वहीं गहलोत के बयान के बाद भाजपा ने पलटवार किया। प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने गहलोत पर सियासी हमला करते हुए कहा कि गहलोत खुद पुत्र मोह से बाहर नहीं हैं और कई सालों से अपने बेटे वैभव गहलोत को आगे बढ़ाने की राजनीति करते रहे हैं। संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल ने कहा जिनके घर ग्लास के होते हैं वे दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते परिवारवाद और भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी कांग्रेस को किसी दूसरे पर अमूल उठाने का कोई अधिकार नहीं है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने बाकायदा प्रेस वार्ता कर कहा कि गहलोत ने जो बयान दिया है लेकिन क्या अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने यह नसीहत अपनाई थी, पुत्र मोह के चलते उन्होंने अपने बेटे वैभव गहलोत को दो बार चुनाव लड़वाने लड़वाया लेकिन जनता ने उन्हें नकार दिया।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी इस मुद्दे बयान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा सोनिया गांधी अपने पुत्र राहुल गांधी को और अशोक गहलोत अपने पुत्र वैभव गहलोत को कई बार सियासी तौर पर लॉन्च करने की नाकाम कोशिश कर चुके हैं। लेकिन जनता ने नकार दिया है। विवाद बढ़ा तो अशोक गहलोत ने अपनी बात स्पष्ट की, उन्होंने कहा कि उनका मतलब राजनीति से नहीं बल्कि सरकारी कामकाज से दूरी रखने से था। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने अपने बेटे को सरकारी आवास में नहीं रखा और हमेशा एक लाइन ऑफ डिस्टिंक्शन बनाए रखी।

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