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इंडियन मार्केट में हर दिन कई मोबाइल कंपनियां अपने स्मार्टफोन लॉन्च कर रही हैं। यूज़र्स की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए मार्केट में नए-नए फोन पेश किए जाते हैं। लॉन्च होने वाले ज़्यादातर नए फोन में आपको वर्चुअल RAM का फीचर देखने को मिलता है। लॉन्च के समय कंपनियां इस फीचर पर खास ध्यान देती हैं, ताकि कस्टमर्स को पता चले कि नया फोन वर्चुअल RAM फीचर के साथ आता है। इसे डायनामिक RAM भी कहते हैं। इसलिए बहुत से लोग सोचते हैं कि यह वर्चुअल RAM क्या है और इसके क्या फायदे हैं? कंपनियां वर्चुअल RAM के लिए फोन में अलग से फिजिकल चिप नहीं लगातीं; बल्कि यह एक सॉफ्टवेयर-बेस्ड टेक्नोलॉजी है। तो, आज के इस आर्टिकल में आइए जानते हैं कि वर्चुअल RAM क्या है और इसके क्या फायदे हैं।
फोन के रिटेल बॉक्स पर लिखा होता है कि फोन 8GB वर्चुअल RAM या 12GB वर्चुअल RAM के साथ आता है। अब इसका क्या मतलब है? आसान शब्दों में, अगर आप 8GB वर्चुअल RAM वाला फोन खरीदते हैं, तो जब आप इस फीचर का इस्तेमाल करेंगे, तो फोन आपके फोन में खाली स्टोरेज स्पेस का इस्तेमाल करेगा और बदले में आपको एक्स्ट्रा RAM देगा।
वर्चुअल RAM कैसे काम करता है?
यह फ़ीचर अब बजट स्मार्टफ़ोन से लेकर फ़्लैगशिप स्मार्टफ़ोन तक, सभी तरह के फ़ोन पर उपलब्ध है। यहाँ एक बात ध्यान देने वाली है कि अगर आपके फ़ोन में काफ़ी खाली जगह नहीं है, तो यह फ़ीचर आपके लिए काम नहीं कर सकता, क्योंकि इसके लिए खाली स्टोरेज स्पेस की ज़रूरत होती है।
वर्चुअल RAM के फ़ायदे
वर्चुअल RAM का इस्तेमाल करके RAM बढ़ाने का पहला फ़ायदा यह है कि इससे मल्टीटास्किंग बेहतर होती है।
दूसरा फ़ायदा यह है कि ज़्यादा RAM की वजह से ऐप्स तेज़ी से लोड हो सकते हैं।
तीसरा फ़ायदा यह है कि जब RAM कम होती है, तो ऐप्स अक्सर क्रैश हो जाते हैं और अचानक बंद हो जाते हैं। ज़्यादा RAM होने से ऐप क्रैश होने से भी बचा जा सकता है।






