आयकर अधिकारी करेंगे डिजिटल गतिविधियों की निगरानी: अप्रैल 2026 से लागू होंगे नए नियम
- byrajasthandesk
- 28 Mar, 2025
नई दिल्ली: 1 अप्रैल 2026 से, आयकर विभाग को करदाताओं की डिजिटल गतिविधियों पर निगरानी रखने की विस्तृत शक्तियाँ प्राप्त होंगी। इसमें ईमेल और सोशल मीडिया खातों की जांच भी शामिल होगी। यह संशोधन आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 132 के तहत किया गया है, जिसके अंतर्गत आयकर अधिकारी संदिग्ध कर चोरी के मामलों में संपत्ति, दस्तावेज़ और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त कर सकते हैं।
डिजिटल संपत्तियों तक पहुंच का विस्तार
नया आयकर विधेयक कर अधिकारियों को बैंक खातों, ऑनलाइन निवेश, ट्रेडिंग पोर्टफोलियो और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच करने का अधिकार देगा। इसका उद्देश्य अघोषित आय, छिपी हुई संपत्तियों और डिजिटल माध्यम से किए गए गुप्त वित्तीय लेन-देन का पता लगाना है।
अप्रैल 2026 से क्या बदलाव होंगे?
वर्तमान में, आयकर अधिकारी केवल भौतिक जांच और बैंक खातों को फ्रीज करने की शक्ति रखते हैं। वे संदेह के आधार पर लैपटॉप, हार्ड ड्राइव और ईमेल की जांच के लिए अनुरोध कर सकते हैं, लेकिन कानूनी सीमाएँ उनकी पहुँच को बाधित करती हैं।
1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए नियमों के तहत, अधिकारियों को डिजिटल प्लेटफार्मों की सीधी जांच करने की अनुमति होगी। इसमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- ईमेल खाते
- सोशल मीडिया प्रोफाइल
- ऑनलाइन वित्तीय लेन-देन
- निवेश रिकॉर्ड
- अन्य डिजिटल वित्तीय प्लेटफॉर्म
असहयोग करने पर अधिकारी कर सकेंगे सुरक्षा उपायों को दरकिनार
यदि कोई व्यक्ति जांच में सहयोग नहीं करता है, तो कर अधिकारी पासवर्ड को बायपास करने, सुरक्षा सेटिंग्स को ओवरराइड करने और एन्क्रिप्टेड फ़ाइलों को अनलॉक करने का अधिकार रखेंगे। नए कानून के तहत, वे डिजिटल उपकरणों से सीधे आवश्यक डेटा निकाल सकते हैं।
किन करदाताओं पर पड़ेगा प्रभाव?
यह नियम सभी करदाताओं पर लागू नहीं होगा। विस्तारित डिजिटल निगरानी केवल उन व्यक्तियों को लक्षित करेगी जो कर चोरी या अघोषित संपत्ति रखने के संदेह के दायरे में आते हैं। वे करदाता जो नियमित रूप से अपने कर का भुगतान करते हैं, उन्हें चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
आयकर विधेयक की धारा 247 के तहत, केवल अधिकृत अधिकारी ही डिजिटल जांच कर सकेंगे। यह जांच सीमित होगी और इसमें केवल ईमेल, सोशल मीडिया रिकॉर्ड, बैंक विवरण और निवेश पोर्टफोलियो शामिल होंगे, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि जांच कानूनी दायरे में हो।
मुख्य बातें: पारदर्शिता रखें, सुरक्षित रहें
डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ, कर अधिकारी नियमों को कड़ा कर रहे हैं ताकि कर धोखाधड़ी को रोका जा सके और कर अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। यह कदम गोपनीयता और डेटा सुरक्षा को लेकर चिंताओं को जन्म दे सकता है, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य वित्तीय अनियमितताओं को रोकना है।
ईमानदार करदाताओं को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उन्हें कर नियमों के बारे में सतर्क रहना चाहिए। अप्रैल 2026 तक, प्रत्येक व्यक्ति को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके कर रिटर्न सटीक हों, सभी निवेश घोषित किए गए हों, और डिजिटल लेन-देन कर कानूनों के अनुरूप हों।






