New Income Tax Act comes into effect from April 1st: टैक्सपेयर्स के लिए क्या बदलेगा और क्यों जरूरी है तैयारी

इनकम टैक्स एक्ट, 2025 इस साल 1 अप्रैल से लागू होने जा रहा है, जो अब तक लागू इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की जगह लेगा। इस बदलाव को लेकर टैक्सपेयर्स के मन में कई सवाल हैं—क्या टैक्स स्लैब बदलेंगे, क्या छूट खत्म होगी, या कंप्लायंस और सख्त हो जाएगा?

सरकार ने साफ कर दिया है कि टैक्स के बेसिक स्ट्रक्चर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। नया कानून मुख्य रूप से नियमों की भाषा को आसान बनाने, प्रक्रियाओं को अपडेट करने और टेक्नोलॉजी आधारित टैक्स प्रशासन पर केंद्रित है।

नया इनकम टैक्स एक्ट क्यों लाया गया?

पुराने इनकम टैक्स कानून में वर्षों के दौरान कई संशोधन हुए, जिससे वह आम टैक्सपेयर्स के लिए जटिल हो गया। नए एक्ट का मकसद टैक्स कानूनों को सरल, स्पष्ट और समझने में आसान बनाना है।

सरकार का कहना है कि यह बदलाव टैक्सपेयर्स और डिपार्टमेंट—दोनों के लिए सिस्टम को ज्यादा प्रभावी बनाएगा।

सरकार का रुख: टैक्स स्ट्रक्चर वही रहेगा

सरकार ने दोहराया है कि टैक्स दरों, स्लैब और मूल ढांचे में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आय की कैटेगरी, छूट, कटौतियां और असेसमेंट से जुड़े मूल नियम पहले जैसे ही रहेंगे।

असल बदलाव नियमों की प्रस्तुति और उनके लागू करने के तरीके में है।

आसान भाषा में लिखे गए नियम

नए इनकम टैक्स एक्ट की सबसे बड़ी खासियत है इसकी सरल भाषा। कानूनी शब्दावली और जटिल संदर्भों को कम किया गया है, जिससे टैक्सपेयर्स को अपनी जिम्मेदारियां समझने में आसानी होगी।

इससे रिटर्न फाइलिंग और नोटिस का जवाब देने में भ्रम कम होने की उम्मीद है।

टैक्स प्रशासन में टेक्नोलॉजी पर जोर

नए कानून में डिजिटल और ऑटोमेटेड प्रोसेसेज को बढ़ावा दिया गया है। इसके तहत:

  • असेसमेंट प्रक्रिया
  • डेटा वेरिफिकेशन
  • नोटिस और कम्युनिकेशन
  • ऑनलाइन फाइलिंग सिस्टम

को और ज्यादा तकनीक आधारित बनाया जाएगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रोसेसिंग टाइम कम होगा।

नए फॉर्म और अपडेटेड प्रोसेस

CBDT नए कानून के अनुसार नए फॉर्म और प्रक्रियाएं तैयार कर रहा है। रिटर्न फाइलिंग और अन्य टैक्स प्रोसेसेज में इनका इस्तेमाल करना होगा।

टैक्सपेयर्स को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे अपडेटेड फॉर्म्स का ही उपयोग करें।

स्वैच्छिक कंप्लायंस पर फोकस

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का फोकस अब वालेंटरी कंप्लायंस पर है। NUDGE जैसे फ्रेमवर्क के जरिए टैक्सपेयर्स को गलतियां सुधारने का मौका दिया जाएगा, बजाय सीधे कार्रवाई के।

इससे टैक्सपेयर्स और विभाग के बीच विश्वास बढ़ने की उम्मीद है।

टैक्सपेयर्स को क्या तैयारी करनी चाहिए?

नए इनकम टैक्स एक्ट के लिए खुद को तैयार रखने के लिए टैक्सपेयर्स को:

  • इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की नोटिफिकेशन पर नजर रखनी चाहिए
  • अपने फाइनेंशियल और टैक्स डॉक्युमेंट्स व्यवस्थित रखने चाहिए
  • फाइलिंग और नोटिस से जुड़े नए प्रोसेस समझने चाहिए
  • जरूरत पड़ने पर टैक्स एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए

टैक्स अधिकारियों की ट्रेनिंग शुरू

CBDT चेयरमैन रवि अग्रवाल ने इनकम टैक्स अधिकारियों को नए कानून की पूरी समझ विकसित करने की सलाह दी है। विभाग का मानना है कि अच्छी ट्रेनिंग से अधिकारी टैक्सपेयर्स को बेहतर गाइड कर सकेंगे।

निष्कर्ष

इनकम टैक्स एक्ट, 2025 का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को सरल, पारदर्शी और आधुनिक बनाना है। हालांकि टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन प्रक्रियात्मक सुधारों से टैक्सपेयर्स को लंबी अवधि में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।