यूनियन बजट 2026: क्या इनकम टैक्स की पुरानी रीजीम को लेकर सरकार कर सकती है बड़ा ऐलान?
- byrajasthandesk
- 14 Jan, 2026
यूनियन बजट 2026 पेश होने में अब कुछ ही हफ्ते बाकी हैं और देशभर के टैक्सपेयर्स की नजरें 1 फरवरी पर टिकी हुई हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस दिन लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश करेंगी। बीते कुछ वर्षों में सरकार का फोकस टैक्स सुधारों पर रहा है, ऐसे में इनकम टैक्स से जुड़े ऐलान सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले हैं।
बजट से पहले सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार इनकम टैक्स की पुरानी रीजीम को लेकर कोई बड़ा फैसला या संकेत दे सकती है।
नई टैक्स रीजीम की शुरुआत कब हुई थी
सरकार ने यूनियन बजट 2020 में इनकम टैक्स की नई रीजीम पेश की थी। इस रीजीम का मकसद टैक्स सिस्टम को सरल बनाना था। इसमें टैक्स दरें कम रखी गईं, लेकिन इसके बदले ज्यादातर छूट और डिडक्शन खत्म कर दिए गए।
शुरुआती वर्षों में टैक्सपेयर्स ने नई रीजीम में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई, क्योंकि पुरानी रीजीम में निवेश और बीमा से जुड़े कई टैक्स फायदे मिलते थे।
पुरानी रीजीम को लेकर क्यों बढ़ी चर्चा
टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि बजट 2026 में सरकार पुरानी रीजीम के भविष्य को लेकर कोई संकेत दे सकती है। भले ही इसे तुरंत खत्म करने की संभावना कम हो, लेकिन लंबे समय से इसमें कोई बदलाव न होना कई सवाल खड़े करता है।
कुछ जानकारों का कहना है कि सरकार नई रीजीम को डिफॉल्ट सिस्टम बनाना चाहती है और पुरानी रीजीम को धीरे-धीरे अप्रासंगिक बनाया जा रहा है।
पुरानी और नई टैक्स रीजीम में मुख्य अंतर
नई टैक्स रीजीम में टैक्स स्लैब सरल और दरें कम हैं, लेकिन इसमें ज्यादातर डिडक्शन और एग्जेम्प्शन नहीं मिलते। इसमें टैक्सपेयर्स को:
- सेक्शन 80C
- सेक्शन 80D
- सेक्शन 24(b)
के तहत टैक्स बेनिफिट्स क्लेम करने की अनुमति नहीं है।
वहीं, पुरानी टैक्स रीजीम में ये सभी डिडक्शन उपलब्ध हैं, जिससे निवेश और होम लोन लेने वालों को ज्यादा फायदा मिलता है।
नई रीजीम को आकर्षक बनाने के लिए सरकार के कदम
सरकार ने नई रीजीम को लोकप्रिय बनाने के लिए लगातार बदलाव किए हैं। यूनियन बजट 2024 में नई रीजीम के तहत स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹50,000 से बढ़ाकर ₹75,000 कर दिया गया।
इसके अलावा, सालाना ₹12 लाख तक की आय को टैक्स-फ्री किया गया और टैक्स स्लैब में बदलाव कर बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट को ₹4 लाख कर दिया गया।
इन उपायों से मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत मिली।
नई टैक्स रीजीम में बढ़ती टैक्सपेयर्स की दिलचस्पी
सरकार के इन फैसलों का सीधा असर देखने को मिला है। असेसमेंट ईयर 2023–24 में करीब 72% इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स ने नई रीजीम को चुना।
एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि अब यह आंकड़ा 80% तक पहुंच सकता है, जो यह दिखाता है कि टैक्सपेयर्स सरल और कम टैक्स वाली व्यवस्था को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
पुरानी रीजीम में क्यों नहीं हुए बदलाव
जहां एक तरफ नई रीजीम को लगातार बेहतर बनाया गया है, वहीं दूसरी ओर पुरानी रीजीम में सेक्शन 80C, 80D और 24(b) के तहत डिडक्शन लिमिट बढ़ाने की मांगों को नजरअंदाज किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सरकार की रणनीति हो सकती है, ताकि बिना किसी औपचारिक घोषणा के टैक्सपेयर्स खुद ही पुरानी रीजीम से दूरी बनाने लगें।
बजट 2026 से टैक्सपेयर्स को क्या उम्मीद
यूनियन बजट 2026 में सरकार शायद पुरानी टैक्स रीजीम को खत्म करने का ऐलान न करे, लेकिन इससे जुड़ा कोई संकेत भविष्य की टैक्स प्लानिंग को जरूर प्रभावित कर सकता है।
अब सभी की निगाहें 1 फरवरी पर हैं, जब यह साफ होगा कि सरकार इनकम टैक्स सिस्टम को किस दिशा में ले जाना चाहती है।






