Ajmer Dargah Sharif: हर साल पीएमओ की और क्यों भेजी जाती हैं अजमेर शरीफ को चादर? जाने कब से हैं ये परंपरा

इंटरनेट डेस्क। ये तो आपने कई जगहों पर पढ़ा होगा कि अजमेर में सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह के सालाना उर्स पर पीएमओ और कई नेताओं के अलावा कई देशों की और से भी चादर चढाने के लिए भेजा जाता है। ये चादर खासतौर पर वहां से आती है और दरगाह पर चढ़ाई जाती है, कई दशकों से अगाध ऐसा हो रहा है। जानकारी के अनुसार नेहरू से लेकर मोदी तक सभी प्रधानमंत्री ऐसा करते रहे हैं। राजस्थान के राज्यपाल और मुख्यमंत्री की ओर से भी ये होता है। इस बार हिंदू सेना इसका विरोध कर रही है, इसे रोकने के लिए उसने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। लेकिन आज जानते हैं पीएमओ ने कब और कैसे ये परंपरा शुरू की और इसकी क्या मान्यता है।

कब से चादर चढ़ाई जा रही
मीडिया रिपोटर्स की माने तो प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से अजमेर शरीफ दरगाह में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के सालाना उर्स के मौके पर चादर चढ़ाने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। ये परंपरा स्वतंत्रता के बाद शुरू हुई थी। पहली बार तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने इसे भेजा था। नेहरू के बाद इंदिरा गांधी, राजीव गांधी सहित सभी प्रधानमंत्रियों ने इसे जारी रखा। मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 2014 से लगातार हर वर्ष चादर भेजते रहे हैं।

चादर क्यों चढ़ाई जाती है?
खबरों की माने तो चादर चढ़ाना श्रद्धा, सम्मान और भक्ति का प्रतीक है, यह परंपरा 800 साल से ज्यादा पुरानी है। सूफी परंपराओं से जुड़ी है। शुरुआत में मजार को ढकने और सम्मान देने के लिए चादर चढ़ाई जाती थी। अब यह अकीदत का नजारा बन गई है। श्रद्धालु चादर चढ़ाकर दुआ मांगते हैं, मन्नतें पूरी होने पर नजराना पेश करते हैं।

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