Chaturmas 2026: जाने किस दिन से शुरू होने जा रहा हैं चातुर्मास, क्या हैं इसका महत्व और किन बातों का रखना होता हैं ध्यान
- byShiv
- 24 Jun, 2026
इंटरनेट डेस्क। सनातन धर्म में चातुर्मास का खास महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी एकादशी) से चातुर्मास की शुरुआत होती है। पंचांग के अनुसार इस साल 2026 में चातुर्मास 25 जुलाई 2026 से आरंभ होकर 20 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी के साथ समाप्त होगा। इस दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है।
क्या है चातुर्मास?
चातुर्मास का शाब्दिक अर्थ है “चार महीने”। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और देवउठनी एकादशी पर जागते हैं। इसी अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। यह समय आध्यात्मिक साधना, व्रत, भक्ति और आत्मचिंतन के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
क्या करें चातुर्मास में
इस अवधी के दौरानप धर्म, तप और भक्ति का काल माना गया है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए जप, तप, दान, व्रत और पूजा का कई गुना फल प्राप्त होता है। साधु-संत भी इस अवधि में एक स्थान पर रहकर धर्म प्रचार और साधना करते हैं।
चातुर्मास में क्या करें?
प्रतिदिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
विष्णु सहस्रनाम, गीता और रामचरितमानस का पाठ करें।
जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान दें।
सात्विक भोजन ग्रहण करें।
एकादशी, प्रदोष और अन्य धार्मिक व्रतों का पालन करें।
क्रोध, अहंकार और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
सुबह और शाम नियमित रूप से दीपक जलाकर आरती करें।
चातुर्मास में क्या नहीं करें?
विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्यों से बचें।
तामसिक भोजन, मांसाहार और नशीले पदार्थों का सेवन न करें।
झूठ बोलने, विवाद करने और किसी का अपमान करने से बचें।
धार्मिक नियमों की अवहेलना न करें।
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