रिटायरमेंट के बाद EPF या EPS से कितनी मिलेगी पेंशन? जानिए नया फॉर्मूला और जरूरी नियम

रिटायरमेंट हर नौकरीपेशा व्यक्ति के जीवन का एक महत्वपूर्ण चरण होता है। इस समय सबसे बड़ी चिंता भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को लेकर होती है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने दो प्रमुख योजनाएं बनाई हैं — कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (EPS)।

अक्सर कर्मचारी यह समझ नहीं पाते कि उनकी सैलरी से कटने वाला पैसा किस योजना में जाता है और रिटायरमेंट के बाद उन्हें कितना लाभ मिलेगा। सही जानकारी होने से भविष्य की योजना बनाना आसान हो जाता है।

EPF और EPS में क्या अंतर है?

EPF एक प्रकार की बचत योजना है। इसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों हर महीने योगदान करते हैं। यह पैसा ब्याज के साथ जमा होता रहता है और रिटायरमेंट के समय कर्मचारी को एकमुश्त राशि के रूप में मिलता है।

वहीं EPS का उद्देश्य पेंशन देना है। यह योजना रिटायरमेंट के बाद हर महीने निश्चित आय प्रदान करती है। यानी EPF से आपको बड़ी रकम मिलती है और EPS से नियमित मासिक पेंशन।

EPS पेंशन की गणना कैसे होती है?

EPS के तहत पेंशन तय करने के लिए एक निश्चित फॉर्मूला लागू किया जाता है:

मासिक पेंशन = (पेंशन योग्य सेवा × पेंशन योग्य वेतन) ÷ 70

  • पेंशन योग्य सेवा का अर्थ है आपने कितने वर्षों तक EPS में योगदान किया।
  • पेंशन योग्य वेतन में बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) का औसत लिया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹15,000 प्रति माह है।

उदाहरण:

यदि किसी कर्मचारी ने 20 साल तक नौकरी की और उसका पेंशन योग्य वेतन ₹15,000 है:

(20 × 15,000) ÷ 70 = ₹4,285 प्रति माह

इस तरह उसे हर महीने लगभग ₹4,285 की पेंशन मिलेगी।

पेंशन पाने की पात्रता शर्तें

EPS के अंतर्गत पेंशन प्राप्त करने के लिए कुछ नियम पूरे करना जरूरी है:

  • कम से कम 10 वर्षों की सेवा अनिवार्य है।
  • 58 वर्ष की आयु पूरी होने पर पेंशन का दावा किया जा सकता है।
  • यदि कोई कर्मचारी 50 से 58 वर्ष के बीच रिटायर होता है तो उसे कम दर पर पेंशन मिलती है।
  • EPS 1995 योजना के अंतर्गत कर्मचारी के परिवार और नामांकित सदस्य को भी पेंशन का लाभ मिलता है।

कर्मचारियों के लिए क्यों जरूरी है EPF और EPS?

देश में करोड़ों कर्मचारी EPF से जुड़े हुए हैं। इनके लिए यह योजनाएं बुढ़ापे का सहारा बनती हैं।

EPF से मिलने वाली एकमुश्त राशि का उपयोग घर की मरम्मत, इलाज या किसी बड़े खर्च के लिए किया जा सकता है। वहीं EPS से हर महीने की नियमित आय मिलती रहती है, जिससे रोजमर्रा की जरूरतें पूरी होती हैं।

इन दोनों योजनाओं का संयोजन कर्मचारियों को आर्थिक और मानसिक सुरक्षा प्रदान करता है।

EPF और EPS मिलकर नौकरीपेशा लोगों के लिए मजबूत सामाजिक सुरक्षा प्रणाली बनाते हैं। जहां EPF से रिटायरमेंट पर बड़ी रकम मिलती है, वहीं EPS से जीवनभर मासिक पेंशन की सुविधा मिलती है।

यदि कर्मचारी समय रहते इन योजनाओं की जानकारी लेकर सही योजना बनाते हैं, तो रिटायरमेंट के बाद उनका जीवन आर्थिक रूप से सुरक्षित और आत्मनिर्भर बन सकता है।