राशन कार्ड नियमों में बड़ा बदलाव: अब हर व्यक्ति को मिल सकता है 7.5 किलो अनाज, जानिए पूरी योजना

भारत में करोड़ों गरीब परिवारों के लिए राशन कार्ड केवल एक पहचान पत्र नहीं, बल्कि उनके जीवन का सहारा है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के जरिए सरकार सस्ते दामों पर अनाज उपलब्ध कराती है। अब केंद्र सरकार एक ऐसा अहम बदलाव करने की तैयारी कर रही है, जिससे अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के तहत मिलने वाले राशन का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।

यह बदलाव वर्षों से चली आ रही असमानता को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि आप या आपके परिवार का कोई सदस्य अंत्योदय कार्ड धारक है, तो यह नई व्यवस्था सीधे आपके मासिक राशन पर असर डाल सकती है।

मौजूदा व्यवस्था में क्या कमी है?

वर्तमान में अंत्योदय राशन कार्ड धारकों को हर महीने प्रति परिवार 35 किलो अनाज दिया जाता है। यह नियम सभी परिवारों पर एक जैसा लागू होता है, चाहे परिवार में 2 सदस्य हों या 7।

इस कारण छोटे परिवारों के पास अतिरिक्त अनाज जमा हो जाता है, जबकि बड़े परिवारों के लिए 35 किलो पूरे महीने के लिए पर्याप्त नहीं होता। इसी असमानता को खत्म करने के लिए सरकार अब “प्रति परिवार” के बजाय “प्रति व्यक्ति” मॉडल अपनाने पर विचार कर रही है।

क्या है नया 7.5 किलो नियम?

खाद्य मंत्रालय से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) में संशोधन की तैयारी की जा रही है।

नए प्रस्ताव के अनुसार:

  • अंत्योदय लाभार्थियों को अब प्रति व्यक्ति 7.5 किलो अनाज मिलेगा।
  • यह मात्रा सामान्य राशन कार्डधारकों को मिलने वाले 5 किलो प्रति व्यक्ति से अधिक होगी।
  • इसका कारण यह है कि अंत्योदय वर्ग में सबसे गरीब और कमजोर परिवार शामिल होते हैं।

सरकार का लक्ष्य है कि इस नई व्यवस्था को मार्च 2026 तक पूरे देश में लागू किया जाए।

किसे होगा फायदा और किसे नुकसान?

इस बदलाव से करीब 1.71 करोड़ अंत्योदय परिवारों पर असर पड़ेगा।

बड़े परिवारों को फायदा:
जिन परिवारों में 5 या उससे अधिक सदस्य हैं, उन्हें पहले से ज्यादा राशन मिलेगा।
उदाहरण के लिए, यदि किसी परिवार में 6 सदस्य हैं तो उन्हें:
7.5 × 6 = 45 किलो अनाज मिलेगा, जो पहले के 35 किलो से ज्यादा है।

छोटे परिवारों पर असर:
जिन परिवारों में 4 या उससे कम सदस्य हैं, उन्हें कुल मात्रा में थोड़ी कमी देखने को मिल सकती है।
4 सदस्यीय परिवार को अब 30 किलो अनाज मिलेगा, जो पहले से 5 किलो कम है।

सरकार की सोच क्या है?

सरकार का मानना है कि इस बदलाव से:

  • अनाज की बर्बादी कम होगी
  • जरूरतमंदों तक सही मात्रा में सहायता पहुंचेगी
  • वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी
  • खाद्य सुरक्षा व्यवस्था अधिक मानवीय बनेगी

यह मॉडल “जरूरत के अनुसार वितरण” की नीति पर आधारित है।

अंत्योदय अन्न योजना किसके लिए है?

अंत्योदय अन्न योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे कई राज्यों में गुलाबी राशन कार्ड भी कहा जाता है।

इस योजना के तहत लाभ पाने वाले प्रमुख वर्ग हैं:

  • भूमिहीन मजदूर और छोटे किसान
  • विधवाएं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति
  • 60 वर्ष से अधिक उम्र के असहाय बुजुर्ग
  • झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले और दिहाड़ी मजदूर

यह बदलाव क्यों जरूरी है?

अगर सरकार इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी देती है, तो यह भारत की खाद्य नीति में ऐतिहासिक सुधार होगा। यह व्यवस्था परिवार नहीं, बल्कि व्यक्ति को केंद्र में रखेगी।

महंगाई के इस दौर में यह बदलाव गरीब और बड़े परिवारों को मजबूत सहारा देगा और उन्हें भूख से लड़ने में मदद करेगा।

राशन वितरण को “प्रति व्यक्ति” आधार पर करना एक अधिक न्यायपूर्ण और व्यावहारिक कदम है। इससे बड़े परिवारों को राहत मिलेगी और छोटे परिवारों में अनावश्यक अनाज जमा होने की समस्या खत्म होगी।

यह सुधार भारत की खाद्य सुरक्षा प्रणाली को ज्यादा संवेदनशील, पारदर्शी और प्रभावी बनाएगा।