नए लेबर कोड्स का असर: क्यों घटी इन-हैंड सैलरी और कैसे बनेगी भविष्य की मजबूत पूंजी
- byrajasthandesk
- 10 Feb, 2026
नए लेबर कोड्स लागू होने के बाद प्राइवेट सेक्टर के कई कर्मचारियों ने देखा कि उनकी इन-हैंड सैलरी पहले से कम हो गई है। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या वाकई सैलरी घटा दी गई है। हकीकत यह है कि ज्यादातर मामलों में यह कटौती नहीं, बल्कि सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव का नतीजा है।
यह बदलाव पहली नजर में नुकसान जैसा लग सकता है, लेकिन लंबे समय में यह कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करता है।
सैलरी स्ट्रक्चर में क्या बदला
नए नियमों के तहत बेसिक सैलरी और डीए को मिलाकर कुल CTC का कम से कम 50 प्रतिशत करना अनिवार्य कर दिया गया है। पहले कई कंपनियां बेसिक सैलरी कम रखकर PF और ग्रेच्युटी की देनदारी घटा देती थीं।
अब बेसिक सैलरी बढ़ने से PF और ग्रेच्युटी दोनों का आधार मजबूत हो गया है।
इन-हैंड सैलरी कम क्यों हुई
PF की कटौती बेसिक सैलरी के प्रतिशत के हिसाब से होती है। जैसे ही बेसिक बढ़ी, कर्मचारी के हिस्से का PF योगदान भी बढ़ गया। इसका सीधा असर मासिक इन-हैंड सैलरी पर पड़ा।
ध्यान देने वाली बात यह है कि कुल CTC में कोई कमी नहीं हुई है। केवल सैलरी का वितरण बदला है।
PF और ग्रेच्युटी का असली फायदा
जो अतिरिक्त पैसा PF में जा रहा है, वह पूरी तरह सेविंग है। कर्मचारी के साथ-साथ कंपनी भी उतनी ही रकम जमा करती है। PF पर मिलने वाला ब्याज इसे और ज्यादा फायदेमंद बनाता है।
बेसिक सैलरी बढ़ने से ग्रेच्युटी भी ज्यादा मिलेगी, खासकर उन कर्मचारियों को जो लंबे समय तक एक ही कंपनी में काम करते हैं।
आसान कैलकुलेशन से समझिए
मान लीजिए आपकी सैलरी ₹50,000 महीना है।
- पहले बेसिक: ₹15,000 → PF कटौती ₹1,800
- अब बेसिक: ₹25,000 → PF कटौती ₹3,000
हर महीने ₹1,200 ज्यादा कटने लगे, यानी साल में ₹14,400 कम इन-हैंड।
लेकिन कुल PF जमा सालाना लगभग ₹28,800 ज्यादा हो जाता है।
20 साल की नौकरी में यही अतिरिक्त PF ब्याज के साथ 13–15 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।
क्यों कुछ कर्मचारियों पर असर नहीं पड़ा
अगर PF पहले से ही वैधानिक सीमा पर कट रहा था, तो इन-हैंड सैलरी में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। असर तभी दिखता है, जब कंपनी बढ़े हुए बेसिक पर PF योगदान लागू करती है।
सोशल सिक्योरिटी होगी मजबूत
नए लेबर कोड्स का मकसद कर्मचारियों को भविष्य के लिए आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाना है। PF, ग्रेच्युटी और अन्य लाभों को मजबूत कर सरकार रिटायरमेंट के बाद स्थिर आय सुनिश्चित करना चाहती है।
हालांकि हर महीने इन-हैंड सैलरी कम होना मुश्किल लगता है, लेकिन लंबी अवधि में यह बदलाव एक मजबूत फाइनेंशियल फाउंडेशन तैयार करता है।





