जुलाई में कमजोर पड़ सकता है मानसून! IMD का बड़ा अपडेट, कम बारिश से खेती और महंगाई पर बढ़ सकती है चिंता
- byrajasthandesk
- 30 Jun, 2026
देशभर में मानसून की गतिविधियों के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जुलाई महीने के लिए नया पूर्वानुमान जारी किया है। ताजा आकलन के अनुसार, जुलाई के दौरान देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि एल नीनो (El Niño) जैसी जलवायु परिस्थितियों का प्रभाव मानसून की रफ्तार और वर्षा के वितरण को प्रभावित कर सकता है।
जून के दौरान कई राज्यों में अपेक्षा से कम बारिश दर्ज की गई थी। ऐसे में यदि जुलाई में भी वर्षा सामान्य से कम रहती है, तो इसका असर खरीफ फसलों की बुआई, जल भंडारण और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर देखने को मिल सकता है। कृषि क्षेत्र और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए जुलाई का मानसून बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
जुलाई में कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान
IMD के ताजा मौसमी पूर्वानुमान के अनुसार, देश के कुछ इलाकों में अच्छी बारिश हो सकती है, लेकिन कई क्षेत्रों में वर्षा का स्तर दीर्घकालिक औसत से नीचे रहने की संभावना है। इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे देश में सूखा रहेगा, बल्कि बारिश का वितरण असमान हो सकता है।
मौसम विभाग लगातार समुद्री और वायुमंडलीय परिस्थितियों की निगरानी कर रहा है और बदलते मौसम के अनुसार समय-समय पर नए अपडेट जारी करेगा।
जून की कम बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता
मानसून की शुरुआती अवधि में कई राज्यों में सामान्य से कम वर्षा होने के कारण खेती की शुरुआती गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। कई किसानों को बुआई में देरी करनी पड़ी, जबकि कुछ क्षेत्रों में सिंचाई पर निर्भरता बढ़ गई।
यदि जुलाई में भी बारिश अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंचती है, तो धान, सोयाबीन, मक्का, कपास और दलहन जैसी खरीफ फसलों की बुआई और शुरुआती विकास पर असर पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई में समय पर और पर्याप्त बारिश अच्छी पैदावार के लिए बेहद जरूरी होती है।
खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ सकता है असर
कम बारिश का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहता। यदि फसल उत्पादन प्रभावित होता है, तो आने वाले महीनों में सब्जियों, अनाज, दालों और अन्य कृषि उत्पादों की आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।
आपूर्ति घटने की स्थिति में बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। यही कारण है कि अर्थशास्त्री और नीति निर्माता मानसून की प्रगति पर लगातार नजर रखते हैं, क्योंकि इसका सीधा संबंध खाद्य महंगाई से होता है।
हालांकि वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले सप्ताहों में बारिश का वितरण कैसा रहता है, सिंचाई की स्थिति क्या होती है और सरकार द्वारा कौन-से कदम उठाए जाते हैं।
जलाशयों और जल संसाधनों पर भी पड़ सकता है प्रभाव
यदि वर्षा सामान्य से कम रहती है, तो बांधों, झीलों और भूजल स्रोतों का जलस्तर अपेक्षित गति से नहीं बढ़ पाएगा। इसका असर सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और कुछ क्षेत्रों में जलविद्युत उत्पादन पर भी पड़ सकता है।
इसी वजह से राज्य सरकारें और जल संसाधन विभाग मानसून के दौरान जलाशयों के स्तर की नियमित निगरानी करते हैं ताकि पानी का बेहतर प्रबंधन किया जा सके।
क्या है एल नीनो और क्यों पड़ता है इसका असर?
एल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री सतही तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इसका प्रभाव दुनिया के कई हिस्सों के मौसम पर पड़ता है।
भारत में कई बार एल नीनो की स्थिति दक्षिण-पश्चिम मानसून को कमजोर करने से जुड़ी रही है। हालांकि हर वर्ष इसका प्रभाव समान नहीं होता, क्योंकि मानसून कई अन्य मौसम संबंधी कारकों पर भी निर्भर करता है।
किसानों को मौसम अपडेट पर नजर रखने की सलाह
कृषि विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसान बुआई, सिंचाई और फसल प्रबंधन से जुड़े निर्णय लेते समय IMD और संबंधित कृषि विभागों द्वारा जारी मौसम बुलेटिन और सलाह का पालन करें।
समय-समय पर मौसम की जानकारी लेने से खेती से जुड़े जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
आने वाले सप्ताह रहेंगे महत्वपूर्ण
हालांकि जुलाई के लिए सामान्य से कम बारिश की संभावना जताई गई है, लेकिन मानसून के दौरान मौसम में तेजी से बदलाव भी संभव है। कई बार कुल वर्षा कम रहने के बावजूद कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश की घटनाएं देखने को मिलती हैं।
IMD आने वाले दिनों में क्षेत्रवार पूर्वानुमान और नए मौसम अपडेट जारी करता रहेगा। ऐसे में किसान, व्यापार जगत और आम लोग मौसम विभाग की आधिकारिक जानकारी पर नजर बनाए रखें।
जुलाई का मानसून भारत की कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। यदि बारिश सामान्य से कम रहती है, तो इसका असर खेती, जल संसाधनों और महंगाई पर पड़ सकता है। हालांकि अंतिम स्थिति आने वाले सप्ताहों में मानसून की प्रगति पर निर्भर करेगी। इसलिए किसानों, उपभोक्ताओं और कारोबार से जुड़े लोगों के लिए आधिकारिक मौसम पूर्वानुमानों के अनुसार अपनी योजनाएं बनाना अधिक उचित रहेगा।





