HRA टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव संभव: इन शहरों के कर्मचारियों की बढ़ सकती है इन-हैंड सैलरी

देश के तेजी से विकसित हो रहे बड़े शहरों में काम करने वाले सैलरीपेशा कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आ सकती है। केंद्र सरकार हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर मिलने वाली टैक्स छूट के नियमों में अहम बदलाव करने पर विचार कर रही है, जिससे कई शहरों में कर्मचारियों की मासिक इन-हैंड सैलरी बढ़ सकती है।

प्रस्तावित ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे बड़े शहरी केंद्रों को 50 प्रतिशत HRA टैक्स छूट की श्रेणी में शामिल किया जा सकता है। फिलहाल यह सुविधा केवल चुनिंदा महानगरों तक सीमित है, जबकि अन्य शहरों में कम सीमा लागू है।

प्रस्ताव में क्या है नया

वर्तमान इनकम टैक्स नियमों के तहत HRA छूट की गणना तीन मानकों में से सबसे कम राशि के आधार पर की जाती है। मेट्रो शहरों में कर्मचारियों को बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) का 50 प्रतिशत तक HRA छूट मिलती है, जबकि अन्य शहरों में यह सीमा कम रहती है।

सरकार अब इस सूची का विस्तार करने पर विचार कर रही है, जिससे नए शहरों में काम करने वाले कर्मचारियों को भी अधिक टैक्स छूट का लाभ मिल सके।

बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी

टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रस्ताव देश की बदलती शहरी संरचना को दर्शाता है। पिछले कुछ वर्षों में कई गैर-मेट्रो शहरों में रियल एस्टेट और किराए की दरें तेज़ी से बढ़ी हैं।

बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में कई इलाकों का किराया पारंपरिक महानगरों के बराबर या उससे अधिक हो चुका है। वहीं पुणे और अहमदाबाद भी प्रमुख रोजगार केंद्र बनकर उभरे हैं, जहां रहने की लागत लगातार बढ़ रही है।

HRA छूट की गणना कैसे होती है

HRA टैक्स छूट की गणना निम्न तीन में से न्यूनतम राशि के आधार पर की जाती है:

  1. कर्मचारी को मिलने वाला वास्तविक HRA
  2. बेसिक सैलरी और DA का तय प्रतिशत
  3. किराया माइनस बेसिक सैलरी और DA का 10 प्रतिशत

अगर नए नियम लागू होते हैं, तो दूसरे बिंदु में आने वाली सीमा बढ़ जाएगी, जिससे टैक्स बचत भी बढ़ेगी।

पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था पर असर

यह ध्यान रखना जरूरी है कि HRA छूट केवल पुरानी टैक्स व्यवस्था में उपलब्ध है। इसलिए इस बदलाव का वास्तविक लाभ उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा, जो पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनते हैं और पर्याप्त कटौतियां क्लेम करते हैं।

जिन कर्मचारियों की कुल कटौतियां अधिक हैं, उनके लिए पुरानी टैक्स व्यवस्था और भी फायदेमंद हो सकती है, खासकर उच्च किराया देने वाले शहरों में।

अभी अंतिम फैसला बाकी

फिलहाल यह प्रस्ताव ड्राफ्ट नियमों का हिस्सा है। सरकार द्वारा आधिकारिक अधिसूचना जारी किए जाने के बाद ही इसे लागू किया जाएगा। तब तक कर्मचारियों को मौजूदा टैक्स नियमों के अनुसार ही अपनी टैक्स प्लानिंग करनी चाहिए।

अगर यह संशोधन लागू होता है, तो यह शहरी कर्मचारियों के लिए एक बड़ा राहत कदम साबित हो सकता है और बढ़ती जीवन-यापन लागत के बीच आर्थिक संतुलन बनाने में मदद करेगा।