Pitru Paksha 2026: जाने इस बार कब से शुरू होगा पितृ पक्ष, किस दिन रहेगा सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध
- byShiv
- 17 Sep, 2026
इंटरनेट डेस्क। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व बताया गया है। बता दें कि आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि के साथ ही पितृ पक्ष की शुरूआत हो जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन 15 दिनों में पितर पृथ्वी पर वास करते हैं और अपने वंश के सदस्यों को आशीर्वाद देते हैं। इसी के कारण इन दिनों में पितरों का तर्पण, श्राद्ध, पिंड दान करने विशेष माना जाता है। आइए जानते हैं साल 2026 में कब से आरंभ हो रहे हैं पितृ पक्ष और श्राद्ध की सभी तिथियां।
कब से आरंभ हो रहा है पितृ पक्ष 2026
पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि का आरंभ 26 सितंबर को रात 10 बजकर 18 मिनट से हो रहा है, जो 27 सितंबर को रात 08 बजकर 58 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में पितृ पक्ष का आरंभ 27 सितंबर 2026 से हो रहा है।
पितृ पक्ष में श्राद्ध की तिथियां
26 सितंबर 2026, शनिवार पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर 2026, रविवार प्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर 2026, सोमवार द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर 2026, मंगलवार तृतीया श्राद्ध और महा भरणी श्राद्ध
30 सितंबर 2026 बुधवार चतुर्थी श्राद्ध और पंचमी श्राद्ध
1 अक्टूबर 2026 गुरुवार षष्ठी श्राद्ध
2 अक्टूबर 2026 शुक्रवार सप्तमी श्राद्ध
3 अक्टूबर 2026 शनिवार अष्टमी श्राद्ध
4 अक्टूबर 2026 रविवार नवमी श्राद्ध
5 अक्टूबर 2026, सोमवार दशमी श्राद्ध
6 अक्टूबर 2026, मंगलवार एकादशी श्राद्ध
7 अक्टूबर 2026, बुधवार द्वादशी श्राद्ध और मघा श्राद्ध
8 अक्टूबर 2026, गुरुवार त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्टूबर 2026, शुक्रवार चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्टूबर 2026, शनिवार- सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध
सर्व पितृ अमावस्या तिथि
सर्व पितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026 को है। श्राद्ध कर्म के लिए दिन का कुतुप मुहूर्त, रौहिण मुहूर्त और उसके बाद का अपराह्न काल महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस दिन क्या करना चाहिए?
सर्व पितृ अमावस्या पर सुबह स्नान करके पितरों का स्मरण करना चाहिए
श्रद्धा के साथ तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान किया जाता है, इसके बाद ब्राह्मण भोजन, जरूरतमंदों को भोजन या वस्त्र का दान और सामर्थ्य के अनुसार अन्न-तिल आदि का दान किया जा सकता है।
पितरों के निमित्त गाय को हरा चारा खिलाना और दीपदान करना भी शुभ माना जाता है
इस दिन भगवद्गीता, विष्णु सहस्रनाम या रुद्र पाठ करके पूर्वजों की शांति के लिए प्रार्थना करने की भी परंपरा है।
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