PAN नियम 2026 प्रस्ताव: कैश, गाड़ी और प्रॉपर्टी डील में नई सीमाएं लागू होने की तैयारी
- byrajasthandesk
- 11 Feb, 2026
सरकार द्वारा प्रस्तावित ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स 2026 में पैन (PAN) से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव सुझाए गए हैं, जो लागू होने पर कई वित्तीय लेनदेन को प्रभावित कर सकते हैं। इन प्रस्तावों का उद्देश्य छोटे और रोजमर्रा के ट्रांजैक्शंस में लोगों को राहत देना है, जबकि बड़े लेनदेन पर निगरानी को और मजबूत बनाना है। इन बदलावों का असर नकद जमा-निकासी, वाहन खरीद, प्रॉपर्टी सौदे और होटल या इवेंट खर्चों जैसे क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
बदलाव का मकसद क्या है?
प्रस्तावित नियमों का मुख्य उद्देश्य है कि सामान्य लेनदेन में बार-बार PAN देने की जरूरत कम हो और केवल बड़े वित्तीय सौदों पर ही अनिवार्यता रहे। इससे लोगों को सुविधा मिलेगी और वित्तीय प्रक्रियाएं सरल होंगी, साथ ही सरकार बड़े लेनदेन पर निगरानी बनाए रख सकेगी।
कैश ट्रांजैक्शन के लिए नई सीमा
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के एक या अधिक बैंक खातों से पूरे वित्त वर्ष में कुल कैश जमा या निकासी ₹10 लाख या उससे अधिक होती है, तभी PAN देना अनिवार्य होगा। वर्तमान नियमों में एक दिन में ₹50,000 से ज्यादा नकद जमा या निकासी पर PAN देना पड़ता है।
यदि नया प्रस्ताव लागू होता है, तो छोटे या नियमित कैश लेनदेन करने वालों को बार-बार PAN देने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे बैंकिंग प्रक्रिया आसान हो सकती है।
वाहन खरीद पर PAN नियम
वाहन खरीद से जुड़े नियमों में भी बदलाव का प्रस्ताव है। अभी अधिकतर मोटर वाहनों की खरीद पर कीमत चाहे कुछ भी हो, PAN देना जरूरी होता है। नए ड्राफ्ट के मुताबिक, दो-पहिया या चार-पहिया वाहन खरीदते समय PAN तभी देना होगा जब वाहन की कीमत ₹5 लाख से ज्यादा हो।
इससे कम कीमत वाले वाहनों के खरीदारों को राहत मिल सकती है, जबकि महंगे वाहनों के लेनदेन पर निगरानी बनी रहेगी।
होटल और इवेंट खर्च की सीमा बढ़ेगी
होटल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल, कन्वेंशन सेंटर या इवेंट मैनेजमेंट सेवाओं के भुगतान पर भी PAN की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव है। नई सीमा ₹1 लाख तय की गई है, जबकि अभी यह ₹50,000 है।
इस बदलाव से छोटे आयोजनों या सामान्य खर्चों के लिए PAN देने की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन बड़े भुगतान पहले की तरह रिकॉर्ड में रहेंगे।
प्रॉपर्टी लेनदेन में नई शर्त
रियल एस्टेट से जुड़े मामलों में भी सीमा बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, जमीन या मकान की खरीद-फरोख्त, गिफ्ट या जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट जैसे मामलों में PAN तभी जरूरी होगा जब लेनदेन की कीमत ₹20 लाख से ज्यादा हो।
मौजूदा नियम में यह सीमा ₹10 लाख है। सीमा बढ़ने से छोटे प्रॉपर्टी सौदों में दस्तावेजी औपचारिकताएं कम हो सकती हैं, जबकि बड़े सौदों पर निगरानी बनी रहेगी।
आम लोगों पर संभावित असर
यदि ड्राफ्ट नियम लागू होते हैं, तो आम करदाताओं को दैनिक वित्तीय गतिविधियों में कम कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। छोटे लेनदेन आसान होंगे और समय की बचत होगी। वहीं बड़े लेनदेन पर नजर रखने से कर पारदर्शिता और सिस्टम की विश्वसनीयता मजबूत हो सकती है।
प्रस्तावित PAN नियम बदलाव एक अधिक व्यावहारिक और संतुलित व्यवस्था की दिशा में कदम माने जा रहे हैं। बढ़ी हुई सीमाओं से छोटे ट्रांजैक्शंस में राहत मिलेगी, जबकि बड़े वित्तीय सौदों पर निगरानी बरकरार रहेगी। यदि ये नियम लागू होते हैं, तो यह व्यवस्था आम लोगों के लिए सुविधाजनक और सिस्टम के लिए अधिक प्रभावी साबित हो सकती है।






