Sawan 2026: सावन में शिवलिंग स्थापना के समय रखें इन नियमों को विशेष ध्यान

इंटरनेट डेस्क। हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र और शुभ माना जाता है। इस वर्ष सावन 2026 की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से होने जा रही है। सावन के दौरान अनेक श्रद्धालु अपने घर में शिवलिंग की स्थापना कर नियमित रूप से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। यदि आप भी इस सावन अपने घर में शिवलिंग स्थापित करने की योजना बना रहे हैं, तो शास्त्रों में बताए गए कुछ महत्वपूर्ण नियमों का पालन अवश्य करें।

शिवलिंग का आकार और धातु
घर के लिए शिवलिंग कभी भी बहुत बड़ा नहीं होना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, घर में स्थापित शिवलिंग का आकार हमारी अंगूठे की लंबाई से बड़ा नहीं होना चाहिए। बहुत बड़ा शिवलिंग केवल मंदिरों के लिए उपयुक्त होता है क्योंकि उनकी ऊर्जा को संभालना और उनकी सेवा करना गृहस्थ जीवन में कठिन हो सकता है। 

दिशा का रखें खास ध्यान
शिवलिंग की स्थापना करते समय दिशा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उत्तर दिशा शिव और शक्ति की दिशा मानी जाती है। स्थापित करते समय आपका मुख दक्षिण की ओर हो सकता है, लेकिन जलधारी (जिस ओर से पानी बहता है) हमेशा उत्तर की तरफ ही रहनी चाहिए।

रोजाना करें जलाभिषेक
घर में शिवलिंग रखने के बाद नियमित पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। प्रतिदिन जल चढ़ाना, “ॐ नमः शिवाय” का जाप करना और बेलपत्र अर्पित करना शुभ माना जाता है।

साफ-सफाई और जल का नियम
शिवलिंग को कभी भी अंधेरे या गंदे स्थान पर न रखें। शिवलिंग की शुद्धि के लिए प्रतिदिन जलाभिषेक अनिवार्य है। अगर आप किसी कारणवश जल नहीं चढ़ा पा रहे हैं, तो वहां शिवलिंग न रखें। इसके अलावा, शिवलिंग पर कभी भी केतकी के फूल, सिंदूर या हल्दी नहीं चढ़ाना चाहिए। क्योंकि ये चीजें शिव पूजा में वर्जित मानी गई हैं।

प्राण प्रतिष्ठा का नियम
घर में रखे जाने वाले छोटे शिवलिंग के लिए भारी-भरकम प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन नियमित पूजा और “ओम नमः शिवाय” का जाप जरूरी है। अगर आप नर्मदेश्वर शिवलिंग लाते हैं, तो उन्हें स्वयंभू माना जाता है, जिन्हें सीधे स्थापित किया जा सकता है।

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