रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद अचानक क्यों टूटा सोना, किस वजह से आई तेज बिकवाली

सोने की कीमतों में हाल ही में रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद अचानक बड़ी गिरावट देखने को मिली। पूरे महीने लगातार तेजी दिखाने के बाद कीमती धातु पर एकदम से भारी बिकवाली हावी हो गई, जिससे घरेलू और वैश्विक दोनों बाजारों में दाम तेजी से नीचे आ गए।

कमोडिटी बाजार में गोल्ड फ्यूचर्स पिछले बंद स्तर की तुलना में करीब 9 फीसदी टूटकर लगभग ₹1,55,569 प्रति 10 ग्राम तक आ गया। दिन के अंत तक थोड़ी रिकवरी जरूर दिखी, लेकिन कीमतें अपने हालिया शिखर से काफी नीचे रहीं।

गौर करने वाली बात यह है कि इससे ठीक एक दिन पहले ही सोने ने लगभग ₹1.82 लाख प्रति 10 ग्राम का ऐतिहासिक उच्च स्तर बनाया था। इतनी तेज पलटी ने बाजार के कई प्रतिभागियों को चौंका दिया, क्योंकि इससे पहले लगातार खरीदारी का माहौल बना हुआ था।

भारी गिरावट के बाद हल्की संभल

दिन में तेज फिसलन के बाद शाम तक सोने में कुछ सुधार आया, फिर भी कीमतें करीब 5 फीसदी नीचे रहकर लगभग ₹1,61,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करती दिखीं। एक ही दिन में इतनी बड़ी उठापटक से यह साफ हुआ कि बाजार का मूड तेजी से बदला।

वैश्विक बाजार में भी स्पॉट गोल्ड कमजोर पड़ा और लगभग 4,988 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में नरमी का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा।

पहले क्यों भाग रहा था सोना

गिरावट से पहले कई हफ्तों तक सोने में जबरदस्त तेजी थी। वैश्विक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव ने सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ा दी थी। साथ ही ब्याज दरों में भविष्य में कटौती की उम्मीद ने भी सोने को सहारा दिया, क्योंकि कम दरों के माहौल में बिना ब्याज वाला सोना ज्यादा आकर्षक लगता है।

महीने की शुरुआत से लेकर हालिया उच्च स्तर तक सोने ने करीब 28 फीसदी का रिटर्न दिया था। इतने कम समय में इतनी बड़ी तेजी ने बाजार को ओवरहीट कर दिया था, जिससे करेक्शन की जमीन तैयार हो गई।

गिरावट की मुख्य वजहें

विशेषज्ञ दो बड़े कारण बताते हैं।

पहला कारण अमेरिकी मौद्रिक नीति से जुड़ी उम्मीदों में बदलाव है। संकेत मिले कि केंद्रीय बैंक की अगली कमान ऐसे व्यक्ति को मिल सकती है जो नीतियों पर ज्यादा सख्त रुख अपना सकता है। इससे डॉलर मजबूत हुआ।

डॉलर मजबूत होने पर आम तौर पर सोने पर दबाव आता है, क्योंकि अन्य मुद्राओं के निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है और सुरक्षित निवेश के तौर पर उसकी चमक कुछ फीकी पड़ती है। जैसे ही डॉलर में तेजी आई, ट्रेडर्स ने सोने में अपनी पोजिशन घटानी शुरू कर दी।

दूसरा बड़ा कारण मुनाफावसूली है। जब कोई एसेट बहुत तेजी से ऊपर जाता है तो अल्पकालिक निवेशक ऊंचे भाव पर बेचकर लाभ सुरक्षित करना चाहते हैं। यही हुआ और शुरुआती गिरावट के बाद बिकवाली और तेज हो गई।

असाधारण तेजी के बाद सामान्य करेक्शन

यह महीना सोने के लिए कई दशकों में सबसे मजबूत महीनों में से एक रहा। लेकिन बाजार कभी भी सीधी रेखा में ऊपर नहीं जाते। बड़ी तेजी के बाद उतना ही तेज करेक्शन आना सामान्य बात है।

ताजा गिरावट दरअसल मजबूत डॉलर, ब्याज दरों से जुड़ी नई उम्मीदों और तेज उछाल के बाद हुई मुनाफावसूली का मिला-जुला असर है। निचले स्तरों से थोड़ी रिकवरी जरूर दिखी, लेकिन इस उतार-चढ़ाव ने दिखा दिया कि वैश्विक संकेतों के प्रति सोना कितना संवेदनशील है।

निवेशकों के लिए यह घटना याद दिलाती है कि सोना भले लंबी अवधि में सुरक्षा दे, लेकिन कम समय में इसकी कीमतों में तेज और बड़े झटके भी आ सकते हैं, खासकर तब जब यह लगातार नए रिकॉर्ड बना चुका हो।