पितृ पक्ष में नया सामान खरीदना वर्जित क्यों माना जाता है? क्या वाकई शास्त्रों में है ऐसा कोई नियम?

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घर में नई चीज आने की खुशी हर किसी के लिए खास होती है। चाहे नया कपड़ा हो, गहना, वाहन या कोई जरूरी सामान, लोग अक्सर उसे खरीदने के लिए शुभ मुहूर्त देखते हैं और पूजा-पाठ के बाद उसका इस्तेमाल शुरू करते हैं। हालांकि लोग पितृ पक्ष में कोई नया सामान खरीदने से डरते हैं।  इस दौरान लोग अपने दिवंगत पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं और उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक कर्म करते हैं।

जानकारी के लिए बता दें कि साल 2026 में पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से हो रही है और इसका समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि इन दिनों नया सामान खरीदना या शुभ कार्य करना उचित होता है या नहीं? क्या वाकई शास्त्रों में ऐसा कोई नियम बताया गया है? आइए जानते हैं।

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पितृ पक्ष में क्यों नहीं खरीदते नया सामान?
पितृ पक्ष पूर्वजों के स्मरण और उनके निमित्त कर्म करने का समय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का समय माना जाता है।  इसी वजह से कई हिंदू परिवार पितृ पक्ष में नए कपड़े, आभूषण, वाहन या अन्य विलासिता की वस्तुएं खरीदने से बचते हैं।  इ

क्या शास्त्रों में खरीदारी पर सीधा प्रतिबंध है?
पितृ पक्ष में हर तरह की खरीदारी को लेकर सभी हिंदू परंपराओं में एक जैसा स्पष्ट शास्त्रीय निषेध नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इसके नियम अलग हो सकते हैं।

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किन चीजों से लोग खासतौर पर बचते हैं?
स अवधि में कई परिवार विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या नई वस्तु खरीदने जैसे मांगलिक कार्यों को टालना पसंद करते हैं। खासकर नए कपड़े, सोना-चांदी, वाहन और घर से जुड़ी बड़ी खरीद को लेकर सावधानी बरती जाती है. हालांकि, जरूरी सामान खरीदने पर सभी परंपराओं में रोक नहीं मानी जाती. रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुएं खरीदना अलग विषय है और इसे शुभ कार्य के समान नहीं माना जाता.