Budget 2026 का समय क्यों बदला गया: जानिए शाम 5 बजे से सुबह 11 बजे तक का सफर
- byrajasthandesk
- 23 Jan, 2026
केंद्रीय बजट 2026 को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट पेश करेंगी। आज सुबह 11 बजे बजट पेश होना आम बात लगती है, लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था। कभी केंद्रीय बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था।
इस बदलाव के पीछे सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि एक लंबा ऐतिहासिक कारण जुड़ा हुआ है।
पहले शाम को क्यों पेश होता था बजट?
आजादी के बाद करीब 53 वर्षों तक केंद्रीय बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता रहा। यह परंपरा अंग्रेजों के शासनकाल से चली आ रही थी। उस समय बजट का समय भारत की जरूरतों के बजाय ब्रिटेन के समय के अनुसार तय किया गया था।
जब भारत में शाम के 5 बजते थे, तब ब्रिटेन में सुबह के 11 बजे होते थे। इस व्यवस्था से वहां की सरकार और अधिकारी बजट से जुड़ी जानकारी आसानी से देख सकते थे।
आजादी के बाद भी क्यों नहीं बदली परंपरा?
भले ही देश आजाद हो गया था, लेकिन कई प्रशासनिक व्यवस्थाएं जस की तस बनी रहीं। बजट का समय भी उन्हीं में से एक था। समय के साथ इस परंपरा की जरूरत खत्म हो चुकी थी, फिर भी इसे बदलने में दशकों लग गए।
1999 में टूटी अंग्रेजों की परंपरा
साल 1999 में आखिरकार इस व्यवस्था को बदला गया। उस समय देश के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे और वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने पहली बार केंद्रीय बजट सुबह 11 बजे पेश किया।
यह फैसला सिर्फ एक समय परिवर्तन नहीं था, बल्कि यह भारत की प्रशासनिक स्वतंत्रता का प्रतीक भी बना।
सुबह बजट पेश करने के फायदे
सुबह बजट पेश होने से संसद, बाजार और नीति-निर्माताओं को पूरे दिन बजट का विश्लेषण करने का समय मिलता है। इससे फैसलों पर चर्चा और प्रतिक्रिया अधिक प्रभावी हो जाती है।
बजट की तारीख में भी हुआ बदलाव
केवल समय ही नहीं, बजट की तारीख भी बदली गई। साल 2017 तक केंद्रीय बजट फरवरी के अंतिम सप्ताह में पेश किया जाता था। इससे नई योजनाओं और टैक्स बदलावों को लागू करने में देरी होती थी।
इसी समस्या को दूर करने के लिए पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने फैसला लिया कि अब बजट हर साल 1 फरवरी को पेश किया जाएगा।
इस बदलाव का उद्देश्य
इस बदलाव का मकसद यह था कि बजट से जुड़े फैसले अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्त वर्ष में समय पर लागू हो सकें। इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आई।
आज सुबह 11 बजे और 1 फरवरी को बजट पेश होना भारत की प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार किया गया एक अहम सुधार है। यह बदलाव दिखाता है कि देश अब औपनिवेशिक परंपराओं से आगे बढ़कर अपने आर्थिक और प्रशासनिक फैसले खुद तय कर रहा है।




