Budget 2026: 1 फरवरी को ही क्यों पेश होता है बजट? जानिए कैसे बदली अंग्रेजों के जमाने की परंपरा
- byrajasthandesk
- 09 Jan, 2026
वित्त वर्ष 2026–27 के लिए केंद्रीय बजट 1 फरवरी 2026 को संसद में पेश किया जाएगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह लगातार नौवां आम बजट होगा। खास बात यह है कि इस बार बजट रविवार के दिन पेश किया जाएगा, जो अपने आप में एक दुर्लभ संयोग है। आज 1 फरवरी की तारीख सामान्य लगती है, लेकिन कुछ साल पहले तक बजट हमेशा 28 फरवरी को ही पेश किया जाता था।
बजट की तारीख और समय में यह बदलाव अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे प्रशासनिक जरूरतें, व्यावहारिक सोच और ब्रिटिश दौर की परंपराओं से बाहर निकलने की मंशा रही है।
पहले 28 फरवरी को ही क्यों आता था बजट?
2017 से पहले भारत में हर साल बजट फरवरी के आखिरी दिन पेश किया जाता था। यह परंपरा ब्रिटिश शासन के समय से चली आ रही थी। उस दौर में सरकार को लगता था कि बजट पेश होने और 1 अप्रैल से लागू होने के बीच का समय पर्याप्त है।
लेकिन जैसे-जैसे सरकार का कामकाज और योजनाएं बढ़ती गईं, यह समय कम पड़ने लगा। मंत्रालयों और राज्य सरकारों को बजट लागू करने की तैयारी के लिए बहुत कम वक्त मिलता था। कई योजनाएं कागजों में ही अटक जाती थीं और विकास कार्यों में देरी होती थी।
1 फरवरी को बजट लाने का फैसला क्यों किया गया?
इन व्यावहारिक समस्याओं को देखते हुए 2017 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बड़ा फैसला लिया। उन्होंने बजट को फरवरी की शुरुआत में पेश करने की घोषणा की। इससे केंद्र और राज्य सरकारों को लगभग दो महीने अतिरिक्त समय मिलने लगा।
इस बदलाव से नई योजनाओं की तैयारी, टेंडर प्रक्रिया और प्रशासनिक मंजूरियों में आसानी हुई। साथ ही, यह कदम ब्रिटिश काल की पुरानी परंपरा से अलग होने का प्रतीक भी बना। तभी से हर साल बजट 1 फरवरी को पेश किया जा रहा है।
शाम 5 बजे की जगह सुबह 11 बजे क्यों आता है बजट?
आज बजट सुबह 11 बजे पेश किया जाता है, लेकिन पहले ऐसा नहीं था। 1999 तक बजट शाम 5 बजे संसद में पेश किया जाता था। इसकी वजह भी अंग्रेजों की परंपरा थी। ब्रिटेन में बजट सुबह 11 बजे आता था, जो भारतीय समय के अनुसार शाम 5 बजे होता था।
आजादी के बाद भी भारत ने कई दशकों तक यही समय अपनाए रखा।
बजट का समय बदलने का फैसला कब हुआ?
1999 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इस परंपरा को बदल दिया। उनका मानना था कि सुबह बजट पेश होने से सांसदों, विशेषज्ञों, मीडिया और आम जनता को पूरे दिन बजट को समझने और उस पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा। तभी से बजट सुबह 11 बजे पेश किया जा रहा है।
रेल बजट को आम बजट में क्यों मिलाया गया?
2017 में एक और ऐतिहासिक बदलाव हुआ, जब करीब 92 साल पुरानी रेल बजट की परंपरा खत्म कर उसे आम बजट में शामिल कर दिया गया। इससे सरकारी खर्च और राजस्व की पूरी तस्वीर एक साथ सामने आने लगी और बजट प्रक्रिया सरल हुई।
ये बदलाव क्यों जरूरी थे?
बजट की तारीख, समय और संरचना में किए गए बदलाव केवल औपचारिक नहीं थे। इनका मकसद बजट को समय पर लागू करना, राज्यों को तैयारी का पर्याप्त समय देना और प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाना था।
Budget 2026 इन्हीं सुधारों की निरंतरता को दर्शाता है, जो भारत की बदलती आर्थिक जरूरतों और आधुनिक शासन प्रणाली के अनुरूप हैं।






