Budget 2026 Wishlist: क्या सेक्शन 80C की डिडक्शन लिमिट 3 लाख रुपये तक बढ़ा सकती हैं निर्मला सीतारमण?
- byrajasthandesk
- 20 Jan, 2026
केंद्रीय बजट 2026 से पहले टैक्सपेयर्स की उम्मीदें एक बार फिर सेक्शन 80C पर टिक गई हैं। टैक्स एक्सपर्ट्स और सैलरी क्लास की सबसे बड़ी मांग यही है कि सेक्शन 80C के तहत मिलने वाली डिडक्शन लिमिट को मौजूदा 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर कम से कम 3 लाख रुपये किया जाए। सवाल यह है कि क्या वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में इस बहुप्रतीक्षित मांग को पूरा करेंगी?
2014 से नहीं बदली 80C की सीमा
सेक्शन 80C इनकम टैक्स एक्ट का सबसे लोकप्रिय प्रावधान माना जाता है, क्योंकि इसका सीधा फायदा करोड़ों मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स को मिलता है। हैरानी की बात यह है कि साल 2014 के बाद से अब तक इस सेक्शन के तहत डिडक्शन की सीमा में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। फिलहाल एक वित्त वर्ष में अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक ही डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है, जबकि इस दौरान महंगाई और जीवन-यापन की लागत में तेज बढ़ोतरी हुई है।
सिर्फ ओल्ड टैक्स रीजीम में मिलता है 80C का फायदा
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज भी बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम को चुनते हैं, क्योंकि इसमें सेक्शन 80C जैसे अहम डिडक्शन का लाभ मिलता है। न्यू टैक्स रीजीम में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में अगर सरकार ओल्ड रीजीम को प्रासंगिक बनाए रखना चाहती है, तो 80C की लिमिट बढ़ाना एक मजबूत कदम हो सकता है।
80C के तहत कौन-कौन से निवेश और खर्च आते हैं?
सेक्शन 80C के अंतर्गत करीब एक दर्जन निवेश और खर्च के विकल्प शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से:
- पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)
- टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड (ELSS)
- लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम
- दो बच्चों की ट्यूशन फीस
- होम लोन का प्रिंसिपल रीपेमेंट
खास बात यह है कि ट्यूशन फीस पर मिलने वाला डिडक्शन निवेश नहीं बल्कि खर्च पर आधारित होता है, इसलिए बड़ी संख्या में परिवार इसका लाभ उठाते हैं।
लिमिट बढ़ने से किसे होगा सबसे ज्यादा फायदा?
अगर सेक्शन 80C की सीमा को बढ़ाकर 3 लाख रुपये किया जाता है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा होम लोन लेने वालों, सैलरी क्लास और मिडिल इनकम फैमिलीज़ को होगा। इससे न सिर्फ टैक्स बचत बढ़ेगी, बल्कि परिवारों को ज्यादा सेविंग और लॉन्ग टर्म इनवेस्टमेंट के लिए भी प्रोत्साहन मिलेगा।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में घरेलू बचत दर में गिरावट आई है। PPF और ELSS जैसे विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए 80C की सीमा बढ़ाना सरकार के लिए एक प्रभावी टूल साबित हो सकता है।






