EPFO के नए PF निकासी नियम: कब, कितनी बार और कितनी रकम निकाल सकते हैं, जानिए पूरी जानकारी
- byrajasthandesk
- 14 Jan, 2026
कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत देते हुए Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) ने PF निकासी से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किए हैं। लंबे समय से PF से पैसा निकालना एक जटिल प्रक्रिया मानी जाती थी, जहां अलग-अलग कारणों के लिए अलग नियम, सेवा अवधि और तकनीकी शर्तें लागू होती थीं।
नए नियमों के तहत EPFO ने निकासी प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ-साथ कर्मचारियों की रिटायरमेंट सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी है।
पहले PF निकालना क्यों था मुश्किल
पहले PF निकासी के लिए करीब 13 अलग-अलग नियम लागू थे। मेडिकल, शिक्षा, शादी या घर के लिए निकासी—हर वजह के लिए अलग सेवा अवधि तय थी, जो 2 साल से लेकर 7 साल तक होती थी। इससे कर्मचारियों को यह समझना मुश्किल हो जाता था कि वे किस नियम के तहत पात्र हैं।
इसके अलावा, अधिकतर मामलों में केवल कर्मचारी के योगदान और उस पर मिलने वाले ब्याज की ही निकासी की अनुमति थी। नियोक्ता का योगदान शामिल नहीं होता था और निकासी सीमा भी 50% से 100% तक सीमित रहती थी।
EPFO के नए नियमों में क्या बदला
EPFO ने अब सभी आंशिक निकासी नियमों को एक ही ढांचे में शामिल कर दिया है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अधिकांश निकासी के लिए न्यूनतम सेवा अवधि घटाकर 12 महीने कर दी गई है।
अब निकासी में शामिल होगा:
- कर्मचारी का योगदान
- नियोक्ता का योगदान
- कुल ब्याज
इसका मतलब है कि कर्मचारी अब कुल पात्र PF बैलेंस का 75% तक निकाल सकते हैं, जो पहले के मुकाबले काफी बड़ी राहत है।
कब निकाल सकते हैं 100% PF राशि
12 महीने की सेवा पूरी करने के बाद, कुछ विशेष परिस्थितियों में पूरा PF बैलेंस निकाला जा सकता है:
- मेडिकल इलाज: स्वयं या परिवार के इलाज के लिए एक वित्त वर्ष में तीन बार।
- शिक्षा: स्वयं या बच्चों की पढ़ाई के लिए पूरी सदस्यता अवधि में 10 बार।
- शादी: स्वयं या बच्चों की शादी के लिए पांच बार।
- घर से जुड़ी जरूरतें: घर खरीदने, निर्माण, होम लोन चुकाने या मरम्मत के लिए पांच बार।
- विशेष स्थिति: बिना किसी खास कारण के, एक वित्त वर्ष में दो बार निकासी।
25% PF राशि क्यों सुरक्षित रखी गई है
EPFO के आंकड़ों से सामने आया कि बार-बार PF निकालने के कारण कर्मचारियों की लंबी अवधि की बचत कमजोर हो रही थी। कई अंतिम सेटलमेंट में PF खातों में ₹20,000 से भी कम राशि बची थी, जबकि करीब 75% खातों में ₹50,000 से कम बैलेंस पाया गया।
इससे कर्मचारी 8.25% की कंपाउंडिंग का लाभ नहीं उठा पा रहे थे। इसी कारण EPFO ने यह अनिवार्य किया है कि कम से कम 25% PF राशि सुरक्षित रहे, ताकि रिटायरमेंट के समय कुछ फंड उपलब्ध हो।
नौकरी छूटने पर PF निकासी के नियम
अगर किसी कर्मचारी की नौकरी चली जाती है, तो वह तुरंत 75% PF बैलेंस निकाल सकता है। इसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान और ब्याज शामिल होगा। शेष 25% राशि एक साल बाद निकाली जा सकती है।
कुछ परिस्थितियों में पूरा PF बैलेंस निकाला जा सकता है, जैसे:
- 55 वर्ष की उम्र के बाद रिटायरमेंट
- स्थायी विकलांगता
- रिट्रेंचमेंट
- स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति
- स्थायी रूप से विदेश जाना
क्या इन नियमों से पेंशन पर असर पड़ेगा
इन बदलावों का पेंशन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। Employees’ Pension Scheme (EPS) के तहत मासिक पेंशन पाने के लिए कम से कम 10 साल की सेवा जरूरी है।
यदि 10 साल पूरे होने से पहले पेंशन की राशि निकाल ली जाती है, तो भविष्य की पेंशन का अधिकार समाप्त हो जाता है। लेकिन यदि पेंशन की राशि नहीं निकाली जाती, तो योगदान बंद होने के बाद भी मृत्यु की स्थिति में परिवार को तीन साल तक पेंशन लाभ मिल सकता है।





