रिकॉर्ड ऊंचाई पर सोने के दाम: मुनाफा बुक करने से पहले जान लें ये अहम टैक्स नियम

सोने की कीमतें इस समय रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं, जिससे बड़ी संख्या में निवेशक अपने निवेश को बेचकर मुनाफा कमाने पर विचार कर रहे हैं। लेकिन बिक्री से पहले टैक्स नियमों को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि अलग-अलग गोल्ड प्रोडक्ट्स पर टैक्स के नियम अलग होते हैं। गलत टैक्स प्लानिंग से आपका मुनाफा कम हो सकता है।

क्यों जरूरी है गोल्ड टैक्स प्लानिंग

आज गोल्ड में निवेश सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं है। गोल्ड बार, कॉइन, डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ETF, गोल्ड सेविंग फंड और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे कई विकल्प मौजूद हैं। हर विकल्प पर टैक्स नियम अलग-अलग लागू होते हैं।

फिजिकल गोल्ड और ज्वेलरी पर टैक्स

इनकम टैक्स कानून के तहत फिजिकल गोल्ड और ज्वेलरी को कैपिटल एसेट माना जाता है।

  • लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन:
    यदि सोना 24 महीने से अधिक समय तक रखा गया है, तो उस पर 12.5% की दर से टैक्स लगता है, बिना इंडेक्सेशन के।
  • शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन:
    24 महीने से पहले बेचने पर मुनाफा आपकी आय में जुड़ता है और स्लैब रेट से टैक्स लगता है।

यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से गोल्ड का व्यापार करता है, तो यह आय बिजनेस इनकम मानी जा सकती है।

गिफ्ट या विरासत में मिले सोने पर टैक्स नियम

  • एक वित्त वर्ष में मिले गिफ्ट्स की कुल वैल्यू ₹50,000 से अधिक होने पर टैक्स लगता है।
  • लेकिन माता-पिता, जीवनसाथी, भाई-बहन जैसे नजदीकी रिश्तेदारों से मिला सोना टैक्स फ्री होता है।
  • शादी या विरासत में मिला सोना प्राप्ति के समय टैक्स के दायरे में नहीं आता।

बिक्री के समय कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है, जिसमें पहले मालिक की खरीद तारीख और कीमत को आधार माना जाता है।

गोल्ड ETF और गोल्ड फंड पर टैक्स

  • गोल्ड ETF:
    12 महीने से ज्यादा होल्ड करने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन माना जाता है।
  • गोल्ड सेविंग फंड:
    इन्हें फिजिकल गोल्ड की तरह माना जाता है, यानी 24 महीने का नियम लागू होता है।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के टैक्स फायदे

  • SGB पर मिलने वाला ब्याज टैक्सेबल होता है।
  • RBI के जरिए मैच्योरिटी पर रिडीम करने पर कैपिटल गेन पूरी तरह टैक्स फ्री होता है।
  • बीच में बाजार में बेचने पर ETF जैसे टैक्स नियम लागू होते हैं।

टैक्स बचाने के विकल्प

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन को धारा 54F के तहत रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी में निवेश करके टैक्स से छूट ली जा सकती है।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे सोने के दाम मुनाफा कमाने का मौका देते हैं, लेकिन टैक्स नियमों की अनदेखी भारी पड़ सकती है। सही जानकारी और प्लानिंग से निवेशक बेहतर रिटर्न और कम टैक्स बोझ सुनिश्चित कर सकते हैं।