ITR Revision 2026: रिटर्न भरने में हुई गलती? जानिए कैसे बिना परेशानी सुधार सकते हैं ITR, क्या है नई समय-सीमा
- byrajasthandesk
- 05 Jul, 2026
ITR Revision Rules 2026: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय सही फॉर्म का चयन करना बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि गलती से गलत ITR फॉर्म भर दिया जाए, तो आपकी रिटर्न डिफेक्टिव या अमान्य घोषित हो सकती है। इसका असर रिफंड मिलने में देरी, आयकर विभाग की नोटिस और अन्य प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है। अच्छी बात यह है कि आयकर कानून टैक्सपेयर्स को अपनी गलती सुधारने का अवसर देता है। अगर समय रहते सही प्रक्रिया अपनाई जाए, तो बिना किसी अतिरिक्त परेशानी के रिटर्न को संशोधित किया जा सकता है।
गलत ITR फॉर्म चुनने पर क्या होता है?
हर ITR फॉर्म अलग-अलग प्रकार के करदाताओं और उनकी आय के स्रोत के अनुसार निर्धारित किया गया है। यदि कोई व्यक्ति गलत फॉर्म में रिटर्न दाखिल कर देता है, तो आयकर विभाग उसे डिफेक्टिव रिटर्न या इनवैलिड रिटर्न घोषित कर सकता है।
ऐसी स्थिति में टैक्स रिफंड अटक सकता है, प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है और आयकर विभाग की ओर से स्पष्टीकरण या सुधार के लिए नोटिस भी जारी किया जा सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गलती का पता चलते ही विभाग की कार्रवाई का इंतजार करने के बजाय स्वयं रिटर्न में संशोधन कर देना चाहिए।
क्या रिवाइज्ड ITR दाखिल किया जा सकता है?
हां, यदि आपने अपना मूल ITR दाखिल कर उसे ई-वेरिफाई भी कर दिया है, तब भी आयकर अधिनियम की धारा 139(5) के तहत रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की सुविधा उपलब्ध है।
रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने के बाद नया रिटर्न पुराने रिटर्न की जगह ले लेता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी करदाता को कैपिटल गेन की आय होने के कारण ITR-2 भरना चाहिए था, लेकिन उसने गलती से ITR-1 दाखिल कर दिया, तो वह संशोधित रिटर्न के जरिए सही फॉर्म चुनकर अपनी गलती सुधार सकता है।
नोटिस आने से पहले सुधार करना क्यों बेहतर है?
टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार यदि विभाग पहले ही आपकी गलती पकड़ लेता है और धारा 139(9) के तहत डिफेक्टिव रिटर्न का नोटिस जारी कर देता है, तो निर्धारित समय के भीतर उसका जवाब देना अनिवार्य होता है।
यदि करदाता समय पर जवाब नहीं देता, तो उसकी रिटर्न को ऐसे माना जा सकता है जैसे उसने कभी रिटर्न दाखिल ही नहीं की हो। इसलिए स्वयं पहल करके जल्द रिवाइज्ड ITR भरना अधिक सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
कितनी बार रिवाइज्ड ITR दाखिल कर सकते हैं?
इनकम टैक्स कानून में रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की संख्या पर कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है।
यदि तय समय-सीमा के भीतर आपको अपनी रिटर्न में बार-बार कोई नई गलती दिखाई देती है, तो आप आवश्यकता अनुसार कई बार संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।
हालांकि टैक्स विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सभी त्रुटियों की अच्छी तरह जांच करने के बाद एक ही बार में अंतिम संशोधित रिटर्न दाखिल करना बेहतर रहता है। बार-बार रिवीजन करने से अनावश्यक जांच या अतिरिक्त प्रश्नों की संभावना बढ़ सकती है।
बजट 2026 में क्या बदला?
बजट 2026 में सरकार ने रिवाइज्ड ITR दाखिल करने की समय-सीमा को बढ़ाकर करदाताओं को अतिरिक्त राहत दी है।
1. अब मिलेगा ज्यादा समय
आकलन वर्ष (AY) 2026-27 के लिए रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दी गई है। यानी अब करदाताओं को अपनी गलती सुधारने के लिए अतिरिक्त तीन महीने का समय मिलेगा।
2. 31 दिसंबर 2026 तक कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं
यदि करदाता 31 दिसंबर 2026 तक अपनी रिटर्न में संशोधन कर देता है, तो उसे किसी अतिरिक्त शुल्क या पेनल्टी का भुगतान नहीं करना होगा।
3. जनवरी से मार्च के बीच लगेगी फीस
यदि संशोधित रिटर्न 1 जनवरी 2027 से 31 मार्च 2027 के बीच दाखिल की जाती है, तो निर्धारित नियमों के अनुसार ₹5,000 तक की अतिरिक्त फीस देनी पड़ सकती है। यह शुल्क संबंधित प्रावधानों और पात्रता के अनुसार लागू होगा।
रिवाइज्ड ITR दाखिल करते समय रखें इन बातों का ध्यान
- सबसे पहले अपनी मूल ITR और सभी दस्तावेजों की दोबारा जांच करें।
- सही ITR फॉर्म का चयन करें।
- बैंक खाते, आय, टीडीएस, कैपिटल गेन और अन्य विवरणों का मिलान कर लें।
- संशोधित रिटर्न दाखिल करने के बाद उसका ई-वेरिफिकेशन अवश्य करें।
- सभी रिकॉर्ड और रसीदें भविष्य के लिए सुरक्षित रखें।
किन मामलों में रिवाइज्ड रिटर्न जरूरी हो सकती है?
रिवाइज्ड ITR की जरूरत निम्न परिस्थितियों में पड़ सकती है—
- गलत ITR फॉर्म का चयन
- किसी आय का छूट जाना
- बैंक खाते या व्यक्तिगत जानकारी में त्रुटि
- टीडीएस या टैक्स भुगतान का गलत विवरण
- कैपिटल गेन या अन्य आय की गलत रिपोर्टिंग
- कटौती (Deduction) या छूट का गलत दावा
ITR दाखिल करते समय गलती होना असामान्य बात नहीं है, लेकिन उसे समय रहते सुधारना बेहद जरूरी है। आयकर विभाग करदाताओं को रिवाइज्ड रिटर्न के माध्यम से अपनी त्रुटियां ठीक करने का अवसर देता है। बजट 2026 में समय-सीमा बढ़ने से करदाताओं को अतिरिक्त राहत भी मिली है। हालांकि, यदि संशोधन समय पर कर दिया जाए तो अतिरिक्त शुल्क से बचा जा सकता है। इसलिए यदि आपको अपनी ITR में किसी भी प्रकार की गलती दिखाई दे, तो नोटिस का इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द संशोधित रिटर्न दाखिल करना समझदारी होगी।




