Oil crisis: खाड़ी से तेल आना हुआ बंद तो किस देश में सबसे पहले खत्म होंगे पेट्रोल और डीजल, भारत का नंबर कर देगा...
- byShiv
- 11 Mar, 2026
इंटरनेट डेस्क। मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर अब ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर पड़ रहा है। इसी बीच भारत में एलपीजी गैस की किल्लत शुरू हो चुकी हैं और पाकिस्तान जैसे देश में पेट्रोल और डीजल के भाव 350 रुपए लीटर को पार कर गए है। आइए जानते हैं कि अगर खाड़ी से तेल आना बंद हो जाए तो सबसे पहले किस देश पर असर पड़ेगा। खाड़ी इलाके में हमले और होर्मुज स्ट्रेट के पास रूकावटों ने दुनिया भर में तेल की कीमतों को प्लस 100 प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा दिया है। फारस की खाड़ी दुनिया के सबसे जरूरी एनर्जी हब में से एक है। सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, इराक और ईरान जैसे देश दुनिया भर में तेल की मांग का एक बड़ा हिस्सा पूरा करते हैं।
तेल की कमी से सबसे ज्यादा प्रभावित देश
कई एशियाई देश इंपोर्टेड तेल पर काफी ज्यादा निर्भर है, साथ ही उनके पास सीमित रिजर्व भी है, अगर गल्फ सप्लाई पूरी तरह से बंद हो जाती है तो इन देशों को कुछ ही हफ्तों में एनर्जी संकट का सामना करना पड़ सकता है, पाकिस्तान सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से है, ऐसा कहा जा रहा है कि देश के पास सिर्फ 20 से 28 दिनों का तेल रिजर्व है। क्योंकि पाकिस्तान काफी ज्यादा इंपोर्ट पर निर्भर है इस वजह से सप्लाई में कोई भी रुकावट एक महीने के अंदर गंभीर फ्यूल संकट पैदा कर सकती है।
इसी के साथ इंडोनेशिया और वियतनाम को भी काफी ज्यादा जोखिम है, इंडोनेशिया के तेल रिजर्व के लगभग 20 दिनों तक चलने का अनुमान है, इसी के साथ वियतनाम के पास लगभग 15 दिनों का रिजर्व हो सकता है। थाईलैंड और फिलिपींस के पास थोड़ा बेहतर बफर है, उनके पास लगभग 60 दिनों का तेल रिजर्व है।
क्या है भारत की स्थिति?
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल कंज्यूमर्स में से एक है, भारत देश अपने 80 प्रतिशत से ज्यादा क्रूड ऑयल की जरूरतों को इंपोर्ट करता है, इन इंपोर्ट का एक बड़ा हिस्सा गल्फ रीजन से आता है, इससे देश वहां की रूकावटों के प्रति कमजोर हो जाता है। भारत के पास वर्तमान में कथित तौर पर लगभग 50 दिनों के लिए काफी तेल और पेट्रोलियम स्टॉक है। सरकार ने रूस और दूसरे देशों सहित तेल इंपोर्ट करके अपने सप्लाई सोर्स को डायवर्सिफाई करने की भी कोशिश की है।
pc- livemint.com






