Paush Month 2025: पौष मास में रुद्राभिषेक का क्या है महत्व, भगवान शिव के आशीर्वाद से दूर होंगी परेशानियां
- byvarsha
- 30 Dec, 2025
PC: navarashtra
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, पौष का महीना आध्यात्मिक रूप से बहुत एनर्जी वाला माना जाता है। यह महीना 21 दिसंबर 2025 से शुरू हो चुका है। यह महीना 14 जनवरी को खत्म होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौष का महीना आध्यात्मिक साधना, आत्म-शुद्धि और ग्रहों के कष्टों से मुक्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। वैसे तो हर दिन भगवान शिव की पूजा करना फायदेमंद होता है, लेकिन पौष के महीने में रुद्राभिषेक करने का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। आइए जानते हैं कि इस महीने में शिव के रुद्र रूप की पूजा क्यों की जाती है और इसके क्या फायदे हैं।
पौष के महीने में रुद्राभिषेक का महत्व
पौष के महीने में सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है, जिसे धनु संक्रांति या खरमास कहा जाता है। इस दौरान शादी जैसे शुभ काम वर्जित माने जाते हैं। जैसा कि शास्त्रों में कहा गया है, जब बाहरी दुनियावी काम रुक जाते हैं, तो अंदरूनी शुद्धि और भगवान की भक्ति का समय शुरू होता है। इसलिए इस समय रुद्राभिषेक करने से आत्मिक शांति मिलती है।
दुख और पापों से मुक्ति
शिव के रुद्र रूप को दुख का नाश करने वाला माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि हमारे जीवन में आने वाली रुकावटें हमारे पिछले जन्मों के पापों का नतीजा होती हैं। पौष महीने में विधि-विधान से किया गया रुद्राभिषेक भक्त द्वारा अनजाने में किए गए पापों को नष्ट करता है और जीवन के कठिन संघर्षों से मुक्ति दिलाता है।
ग्रह दोषों से मुक्ति
ज्योतिष के अनुसार, कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष, पितृ दोष या शनि की ढैय्या/साढ़े साती के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए रुद्राभिषेक एक बेमिसाल उपाय है। पौष महीने में भगवान शिव की पूजा करने से ग्रहों के बुरे असर को शुभ में बदला जा सकता है।
पुष्य नक्षत्र और अनंत पुण्य
पौष महीने की पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में होता है। पुष्य नक्षत्र को सभी नक्षत्रों का राजा माना जाता है और इसे सफल कामों के लिए बहुत शुभ माना जाता है। इस समय किया गया रुद्राभिषेक अक्षय पुण्य यानी कभी न खत्म होने वाले पुण्य का फल देता है।
रुद्राभिषेक कैसे करें
सुबह जल्दी उठें और उठने के बाद साफ कपड़े पहनें। भगवान की मूर्ति को साफ करें और श्रद्धा से भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने का संकल्प लें। भगवान के पास तांबे, पीतल या पत्थर के बर्तन में शिवलिंग स्थापित करें। शिवलिंग का मुंह उत्तर दिशा में होना शुभ माना जाता है। उसके बाद गणेश जी की पूजा करके पूजा शुरू करें, फिर मंत्र बोलते हुए शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और गन्ने का रस चढ़ाएं। अभिषेक के बाद शिवलिंग पर बेल के पत्ते, धतूरा, राख और सफेद फूल चढ़ाएं। धूप जलाएं और भगवान शिव की आरती करें, उनसे आशीर्वाद मांगें।
रुद्राभिषेक का महत्व
रुद्राभिषेक सिर्फ पूजा का एक रिवाज नहीं है बल्कि एक दिव्य रिवाज है जो भगवान शिव की कृपा पाने का आह्वान करता है। इसमें, वेदों में बताए अनुसार, रुद्र मंत्रों का जाप करते हुए शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, घी और गन्ने के रस की पवित्र धाराएं डाली जाती हैं। रुद्र प्रसन्न होकर भक्तों के जीवन से पाप, दोष और रोग दूर करते हैं। यह अभिषेक नकारात्मक ऊर्जा को शांत करता है, ग्रहों की बाधाओं को दूर करता है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता है।





