PM-KISAN भुगतान अपडेट: eKYC फेल होने से किसानों की परेशानी और बढ़ी

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना का उद्देश्य देश के किसानों को सीधी आर्थिक सहायता देना है। लेकिन हालिया आंकड़े और जमीनी रिपोर्टें बता रही हैं कि eKYC, आधार सीडिंग और जमीन के डिजिटल सत्यापन जैसी तकनीकी शर्तें अब किसानों के लिए बड़ी बाधा बनती जा रही हैं। पारदर्शिता के नाम पर लागू की गई ये प्रक्रियाएं कई पात्र किसानों के लिए भुगतान रुकने का कारण बन गई हैं।

डिजिटल इंडिया बनाम ग्रामीण हकीकत

फर्जी लाभार्थियों को हटाने के लिए सरकार ने eKYC अनिवार्य किया। नीति के स्तर पर यह फैसला सही लगता है, लेकिन गांवों की स्थिति अलग है। कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी, तकनीकी जानकारी की कमी और बायोमेट्रिक मशीनों पर निर्भरता ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

कई बुजुर्ग किसानों के अंगूठों की पहचान मशीन नहीं कर पाती क्योंकि वर्षों की मेहनत से उंगलियों की लकीरें घिस चुकी होती हैं। नतीजतन सिस्टम उन्हें “सत्यापन अधूरा” दिखा देता है। फेस ऑथेंटिकेशन ऐप भी कम रोशनी, साधारण मोबाइल कैमरे और सर्वर स्लो होने के कारण अक्सर फेल हो जाता है।

आधार और बैंक खाते का मिसमैच

अगर पीएम-किसान पोर्टल और आधार कार्ड में नाम की स्पेलिंग में हल्का सा भी फर्क हो, तो किस्त रोक दी जाती है। अधिकारियों के लिए यह “डेटा एरर” है, लेकिन किसान के लिए इसका मतलब महीनों तक पैसे न मिलना है।

इसके अलावा लैंड सीडिंग यानी जमीन के रिकॉर्ड का डिजिटल सत्यापन भी बड़ी समस्या बन गया है। कई राज्यों में भूमि रिकॉर्ड अपडेट नहीं हैं। किसान अपनी ही जमीन का मालिक होने का प्रमाण देने के लिए पटवारी, तहसील और कृषि विभाग के चक्कर काट रहे हैं।

लाखों किसान सूची से बाहर

पिछली कुछ किस्तों में बड़ी संख्या में किसानों के नाम लाभार्थी सूची से हटाए गए हैं। सरकार इसे डेटा सुधार बता रही है, लेकिन सामाजिक संगठनों का कहना है कि इस प्रक्रिया में कई वास्तविक और जरूरतमंद किसान भी बाहर हो गए।

कई किसानों ने CSC सेंटर जाकर शुल्क देकर eKYC कराया, फिर भी हफ्तों बाद उनका स्टेटस “लंबित” ही दिख रहा है। यह अनिश्चितता किसानों में मानसिक तनाव पैदा कर रही है।

अधिकार या सिर्फ सुविधा?

संविधान का अनुच्छेद 21 गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार देता है। जब कल्याणकारी योजनाएं इतनी तकनीकी हो जाएं कि आम किसान उन्हें पूरा न कर सके, तो सवाल उठता है—क्या यह मदद अधिकार है या केवल सुविधा?

विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक साधन होनी चाहिए, बाधा नहीं। अगर सिस्टम की विफलता से किसान को उसका हक नहीं मिल रहा, तो जिम्मेदारी प्रशासन की होनी चाहिए।

आगे का रास्ता

विशेषज्ञ सुझाव देते हैं:

  • eKYC फेल होने पर अस्थायी मैनुअल सत्यापन
  • सर्वर और इंटरनेट सुविधा में सुधार
  • नाम और जमीन सुधार की आसान प्रक्रिया
  • CSC सेवाओं को मुफ्त बनाना

PM-KISAN योजना किसानों के लिए जीवनरेखा है, लेकिन तकनीकी दिक्कतें इसकी प्रभावशीलता को कमजोर कर रही हैं। जब तक डिजिटल सिस्टम को किसान-अनुकूल नहीं बनाया जाता, तब तक नीति और ज़मीनी हकीकत के बीच की दूरी बनी रहेगी। तकनीक को किसानों की मदद करनी चाहिए, न कि उनकी पात्रता तय करनी चाहिए।