रिटायरमेंट प्लानिंग: भारत में क्यों फेल हो जाता है 4% FIRE रूल और क्या है सही तरीका?

आजकल भारत में भी जल्दी रिटायर होने का सपना देखने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। नौकरी की टेंशन से छुटकारा, अपने समय पर जीना और पैसों की चिंता से मुक्त रहना – यही है FIRE यानी Financial Independence, Retire Early का मकसद।

लेकिन सवाल यह है कि क्या अमेरिका से आया 4% वाला फॉर्मूला भारत में सच में काम करता है?
जवाब है – नहीं, और इसके पीछे कई ठोस वजहें हैं।

4% रूल क्या है और कहां से आया?

4% विड्रॉल रूल अमेरिका के फाइनेंशियल प्लानर विलियम बेनगेन ने दिया था। उनके मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति अपने रिटायरमेंट फंड से हर साल 4% पैसा निकालता है और हर साल उस रकम को महंगाई के हिसाब से बढ़ाता है, तो उसका पैसा करीब 30 साल तक चल सकता है।

यही फॉर्मूला FIRE मूवमेंट की नींव बना –
सालाना खर्च × 25 = रिटायरमेंट फंड

लेकिन यह फॉर्मूला पूरी तरह अमेरिकी हालात पर आधारित है।

भारत में क्यों फेल होता है यह फॉर्मूला?

भारत और अमेरिका की आर्थिक स्थिति में बड़ा अंतर है।

  • अमेरिका में महंगाई आमतौर पर 2–3% रहती है
  • भारत में महंगाई औसतन 5–6% रहती है
  • हेल्थकेयर, हाउसिंग और एजुकेशन में यह 8–10% तक पहुंच जाती है

इसका सीधा मतलब है –
भारत में खर्च बहुत तेजी से बढ़ता है।

एक उदाहरण से समझिए

मान लीजिए रमेश का रिटायरमेंट के बाद सालाना खर्च ₹12 लाख है।
FIRE फॉर्मूले के हिसाब से उसे चाहिए:

₹12 लाख × 25 = ₹3 करोड़

अब अगर रमेश हर साल 4% निकालता है और महंगाई के कारण हर साल 6% बढ़ाता है, और उसके निवेश पर 7% रिटर्न मिलता है, तो भी उसका पैसा करीब 29 साल में खत्म हो जाएगा।

यानि अगर रमेश 50 साल में रिटायर होता है, तो 79 साल तक पहुंचते-पहुंचते उसका फंड खत्म हो सकता है – जो बहुत बड़ा जोखिम है।

भारत में खतरे क्यों ज्यादा हैं?

  1. हेल्थकेयर खर्च बहुत महंगा – ज्यादातर इलाज अपनी जेब से करना पड़ता है
  2. लाइफस्टाइल इंफ्लेशन – उम्र बढ़ने के साथ आराम और सुविधाओं की जरूरत बढ़ती है
  3. लंबी उम्र – अब लोग 85–90 साल तक जी रहे हैं
  4. मार्केट में उतार-चढ़ाव – कुछ खराब साल आपकी पूरी प्लानिंग बिगाड़ सकते हैं

इसीलिए एक्सपर्ट्स मानते हैं कि 4% रूल भारत में खतरनाक साबित हो सकता है।

तो सही तरीका क्या है?

विकल्प 1: सेमी रिटायरमेंट अपनाएं

पूरी तरह काम छोड़ने की बजाय:

  • पार्ट टाइम काम करें
  • फ्रीलांसिंग करें
  • कंसल्टिंग लें
  • किराये या ऑनलाइन इनकम बनाएं

छोटी सी इनकम भी आपके रिटायरमेंट फंड पर दबाव कम कर देती है।

विकल्प 2: बड़ा फंड तैयार करें

भारत में एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं:

25 गुना नहीं, 35 से 40 गुना तक सेविंग करें

अगर सालाना खर्च ₹12 लाख है, तो टारगेट रखें:

  • ₹4.2 करोड़ से ₹4.8 करोड़

इससे महंगाई, मेडिकल खर्च और बाजार के जोखिम को संभालना आसान हो जाता है।

एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?

फाइनेंशियल प्लानर्स का कहना है कि:

  • भारत में सोशल सिक्योरिटी नहीं है
  • हेल्थ इंश्योरेंस जरूरी है
  • इमरजेंसी फंड होना चाहिए
  • हर 2–3 साल में प्लान रिव्यू करें

बिना सही तैयारी के जल्दी रिटायरमेंट भारी नुकसान पहुंचा सकता है।

भारत में जल्दी रिटायर होना नामुमकिन नहीं, लेकिन आंख बंद करके अमेरिका का 4% रूल अपनाना बहुत बड़ी गलती हो सकती है।

अगर आप सच में फाइनेंशियल फ्रीडम चाहते हैं, तो:

  • बड़ा फंड बनाएं
  • इनकम के विकल्प रखें
  • और हकीकत के हिसाब से प्लान करें

क्योंकि असली लक्ष्य सिर्फ जल्दी रिटायर होना नहीं, बल्कि
बिना डर और बिना टेंशन के रिटायर होना है।