शेयर बाजार में हाहाकार: क्या गिरावट के बीच SIP बंद करना सही? जानिए एक्सपर्ट की पूरी राय
- byrajasthandesk
- 20 Jan, 2026
भारतीय शेयर बाजार में हालिया तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। मंगलवार को सेंसेक्स करीब 1000 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी में भी 350 अंकों से अधिक की गिरावट देखने को मिली। इस अचानक आई गिरावट से बाजार पूंजीकरण में लगभग ₹10 लाख करोड़ की कमी दर्ज की गई। ऐसे माहौल में SIP (Systematic Investment Plan) के जरिए निवेश करने वाले निवेशक सबसे ज्यादा असमंजस में हैं। सवाल यही है—क्या अब SIP बंद कर देनी चाहिए या गिरावट को अवसर मानकर निवेश जारी रखना चाहिए?
क्या SIP निवेशकों को घबराने की जरूरत है?
मार्केट एक्सपर्ट्स की राय में, गिरावट के समय SIP बंद करना आमतौर पर गलत फैसला साबित हो सकता है। Master Capital Services Ltd के डायरेक्टर गुरमीत सिंह चावला के अनुसार, बाजार में करेक्शन SIP निवेशकों के लिए फायदेमंद होता है। जब बाजार नीचे होता है, तब एक ही रकम में ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं, जिससे लॉन्ग टर्म में रिटर्न बेहतर हो सकता है। इसे ही रुपी-कॉस्ट एवरेजिंग कहा जाता है।
उनका कहना है कि बाजार के पूरी तरह स्थिर होने का इंतजार करने से कई बार अच्छे मौके हाथ से निकल जाते हैं। SIP का असली फायदा यही है कि यह निवेश में अनुशासन बनाए रखती है और भावनाओं के आधार पर गलत फैसले लेने से बचाती है।
परफेक्ट एंट्री का इंतजार क्यों नुकसानदेह हो सकता है?
Simple Hai के एडिटर-इन-चीफ विवेक लॉ मानते हैं कि लाइफटाइम हाई के बाद बाजार का गिरना बिल्कुल सामान्य प्रक्रिया है। शॉर्ट टर्म में यह डरावना लग सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म निवेशकों को “परफेक्ट बॉटम” की तलाश से बचना चाहिए। करेक्शन के दौरान धीरे-धीरे और नियमित निवेश करना ज्यादा समझदारी भरा कदम है।
क्या मौजूदा SIP बंद करनी चाहिए?
Anand Rathi Wealth के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अर्जुन गुहा ठाकुरता का कहना है कि मौजूदा गिरावट को बड़ी करेक्शन नहीं कहा जा सकता, क्योंकि बाजार अपने उच्च स्तर से सिर्फ 3–4% ही नीचे है। ऐसे में SIP बंद करना बिल्कुल भी सही रणनीति नहीं है। अगर संभव हो, तो स्टेप-अप SIP के जरिए निवेश राशि धीरे-धीरे बढ़ाई जा सकती है।
उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले बजट और ग्लोबल फैक्टर्स के चलते बाजार में कुछ और उतार-चढ़ाव रह सकता है, लेकिन SIP निवेशकों के लिए यह उतार-चढ़ाव लंबे समय में फायदेमंद ही होता है।
एकमुश्त निवेश करने वालों के लिए क्या रणनीति हो?
जिन निवेशकों के पास बड़ी रकम एक साथ निवेश करने के लिए है, उन्हें पूरी राशि एक बार में लगाने से बचना चाहिए। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि निवेश को 3–4 हिस्सों में बांटकर चरणबद्ध तरीके से बाजार में उतारा जाए, ताकि औसत एंट्री लेवल मिल सके।
SIP क्यों है लॉन्ग टर्म वेल्थ की कुंजी?
Bonanza की रिसर्च एनालिस्ट खुशी मिस्त्री के मुताबिक, नए हाई के बाद आने वाली गिरावट आमतौर पर हेल्दी करेक्शन होती है। यह न तो घबराकर बेचने का संकेत है और न ही आक्रामक खरीद का। ऐसे दौर में SIP जारी रखना और जरूरत हो तो थोड़ी बढ़ोतरी करना, बाजार को टाइम करने से कहीं बेहतर रणनीति है।
इतिहास बताता है कि भारतीय शेयर बाजार में हर 12–18 महीनों में 10–15% तक की गिरावट आती रही है, लेकिन इसके बावजूद निफ्टी 50 ने लंबी अवधि में 12–14% CAGR रिटर्न दिया है। यही वजह है कि SIP निवेशकों के बीच भरोसा लगातार बढ़ रहा है।






