'यूपी की सभी 403 सीटों पर लड़ेंगे चुनाव': भाजपा को चिराग पासवान का अल्टीमेटम, वाराणसी में दिया बड़ा बयान

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केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि यदि यूपी में भाजपा के साथ सीट शेयरिंग पर सहमति नहीं बनी, तो उनकी पार्टी राज्य की सभी 403 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दौरे के दौरान चिराग पासवान ने कहा, "केंद्र और बिहार में हमारा भाजपा के साथ मजबूत गठबंधन है। हम उत्तर प्रदेश में भी एनडीए (NDA) के घटक दल के रूप में चुनाव लड़ना चाहते हैं। लेकिन अगर सीटों पर बात नहीं बनी, तो हम अकेले दम पर सभी सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।"

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करते हुए चिराग ने कहा कि उनके साथ रिश्ते बहुत अच्छे हैं। हालांकि, अपने पुराने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, "2023 के नागालैंड विधानसभा चुनाव में हमने अकेले चुनाव लड़ा था और दो सीटें जीती थीं।"

दलित वोट बैंक पर नजर और राजनीतिक बयानबाजी
उत्तर प्रदेश के जिलों में दलित मतदाताओं—विशेषकर जाटव और पासी समुदाय—के बीच लोजपा (रामविलास) का कुछ प्रभाव माना जाता है। हालांकि, योगी कैबिनेट के मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने हाल ही में चिराग पर निशाना साधते हुए कहा था कि "उत्तर प्रदेश की राजनीति में चिराग पासवान के लिए कोई जगह नहीं है।"

पिता रामविलास पासवान के नक्शेकदम पर चिराग
चिराग पासवान अपनी पार्टी को बिहार के बाहर विस्तार देने की उसी रणनीति पर चल रहे हैं, जो उनके पिता स्वर्गीय रामविलास पासवान की रही है। रामविलास पासवान ने केंद्र में मंत्री रहते हुए भी देश के अलग-अलग राज्यों में अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतारे थे।

2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी चिराग ने भाजपा के खिलाफ उम्मीदवार न उतारते हुए सीधे नीतीश कुमार की जदयू (JDU) को चुनौती दी थी। यद्यपि लोजपा को केवल एक सीट पर जीत मिली थी, लेकिन उसे 5.5% से अधिक वोट मिले थे।

राजनीतिक उथल-पुथल के बाद केंद्रीय राजनीति में मजबूत वापसी
2021 में पार्टी टूटने के बाद चिराग के चाचा पशुपति पारस के गुट को भाजपा और जदयू ने समर्थन दिया था, और पारस को केंद्र में मंत्री भी बनाया गया था। लेकिन जब यह स्पष्ट हो गया कि लोजपा का मुख्य दलित वोट बैंक चिराग पासवान के साथ है, तो भाजपा ने रुख बदला।

पिछले लोकसभा चुनाव में एनडीए ने चिराग के साथ गठबंधन किया और उनकी पार्टी को दी गई सभी 5 सीटों पर लोजपा (रामविलास) ने जीत हासिल की। इसके बाद बिहार विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने एनडीए सहयोगी के रूप में 28 सीटों पर चुनाव लड़कर 19 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की थी। अब चिराग की नजरें उत्तर प्रदेश में अपनी पैठ मजबूत करने पर हैं।