BCCI Chief Selector Controversy: वसीम जाफर की दावेदारी पीछे छूटी, प्रज्ञान ओझा बने नई चयन समिति के चेयरमैन; जानें क्यों मिला मौका

PC: TV9

अजीत अगरकर का कार्यकाल खत्म होने के बाद अब सिलेक्शन कमिटी की कमान पूर्व स्पिनर प्रज्ञान ओझा को सौंप दी गई है। अजीत अगरकर की लीडरशिप में भारत ने पिछले कुछ सालों में तीन ICC ट्रॉफी और कई बड़े टाइटल जीते हैं। प्रज्ञान ओझा की लीडरशिप में BCCI ने पूर्व स्पिनर रमेश पवार को पुरुषों की सिलेक्शन कमिटी का नया मेंबर बनाया है। रमेश पवार के पास कोचिंग का अनुभव है और उन्होंने महिला टीम को एशिया कप और कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल दिलाए हैं। अब सवाल यह है कि जब पूर्व क्रिकेटर वसीम जाफर इस पद के लिए सबसे संभावित उम्मीदवार हैं तो प्रज्ञान ओझा को यह पद क्यों दिया गया है।

चीफ सिलेक्टर की नियुक्ति में टेस्ट अनुभव सबसे अहम फैक्टर है। मौजूदा सिलेक्शन प्रोसेस के अनुसार, जोन का वह मेंबर जिसने सबसे ज्यादा टेस्ट मैच खेले हैं, वही सिलेक्शन कमिटी का चेयरमैन बनने की दौड़ में है। वसीम जाफर ने कुल 31 टेस्ट मैच खेले हैं। पूर्व भारतीय स्पिनर प्रज्ञान ओझा ने 24 टेस्ट मैच खेले हैं, फिर भी उन्हें यह पद दिया गया है। लेकिन अब यह समझा जा रहा है कि सिर्फ़ टेस्ट मैचों की संख्या को अपॉइंटमेंट के लिए पक्का क्राइटेरिया नहीं माना जाता है। आखिरी फ़ैसला क्रिकेट एडवाइज़री कमेटी और BCCI प्रोसेस के तहत होता है।

क्रिकेट एडवाइज़री कमेटी में अशोक मल्होत्रा ​​और जतिन परांजपे हैं। हालांकि वसीम जाफ़र ने अप्लाई किया था, लेकिन प्रज्ञान ओझा को चुना गया है क्योंकि उन्हें BCCI की इंटरनल कमेटी का सपोर्ट है। BCCI में कई लोगों का पक्का मानना ​​है कि प्रज्ञान ओझा को सिलेक्शन कमेटी का चेयरमैन बनाया जाना चाहिए, इसीलिए ऐसा फ़ैसला लिया गया है।

अगरकर का कार्यकाल काफ़ी विवादित टॉपिक बन गया था। अगरकर के कार्यकाल में इंडियन टीम में कई ज़रूरी बदलाव हुए थे। विराट कोहली, रोहित शर्मा और रविचंद्रन अश्विन जैसे खिलाड़ियों को रिटायर होना पड़ा था, जिसकी वजह से अगरकर को काफ़ी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा था।