Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में श्राद्ध कर्म करने के लिए राजस्थान की यह जगह हैं खास, 5 पीढ़ियों तक के पितरो को मिलता हैं मोक्ष
- byShiv
- 30 Sep, 2026
इंटरनेट डेस्क। पितृपक्ष शुरू हो चुका हैं और और इसका समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या का दिन होगा, हिंदू सनातन परंपरा में पितृपक्ष की अवधि को विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। इस समय हम अपने पूर्वजों को श्रद्धा से याद करते हैं और श्राद्ध पक्ष के दौरान अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके निमित्त तर्पण, पिंडदान एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। वैसे देशभर में कई तीर्थस्थल श्राद्ध और तर्पण के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन राजस्थान के पुष्कर को पितृ कर्म के लिए विशेष तीर्थ माना जाता है। मान्यता है कि यहां श्रद्धालु अपने 7 कुलों और 5 पीढ़ियों तक के पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध कर्म कर सकते हैं।
जगत पिता भगवान ब्रह्मा का मंदिर
तीर्थ गुरु पुष्कर धार्मिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भारत के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है। पुष्कर की सबसे बड़ी विशेषताओं में यहां स्थित जगत पिता भगवान ब्रह्मा का मंदिर है। पुष्कर की धार्मिक महत्ता केवल ब्रह्मा मंदिर तक सीमित नहीं है, पुष्कर सरोवर के किनारे पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है, मान्यता के अनुसार, यहां श्रद्धा के साथ किए गए श्राद्ध और तर्पण से पितरों को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
होते हैं अनुष्ठान
पुष्कर के तीर्थ पुरोहितों के पास देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं और उनके पूर्वजों की पोथियां भी सुरक्षित रहती है। इन पोथियों में परिवार और पूर्वजों से संबंधित नाम एवं विवरण दर्ज होने की परंपरा बताई जाती है। देश के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े तीर्थ पुरोहित यहां आने वाले श्रद्धालुओं की परंपरा और मान्यता के अनुसार श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान तथा पितृ शांति के अनुष्ठान करवाते हैं।
pc- danik bhaskar





