इनकम टैक्स रूल्स 2026 का ड्राफ्ट जारी, ज्वेलरी और प्रॉपर्टी की वैल्यू तय करने के नए नियम सामने
- byrajasthandesk
- 08 Feb, 2026
इनकम टैक्स विभाग ने ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स, 2026 जारी कर दिए हैं और इन्हें आम जनता, टैक्स प्रोफेशनल्स और अन्य हितधारकों के सुझाव के लिए सार्वजनिक किया गया है। ये प्रस्तावित नियम इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के अनुरूप बनाए गए हैं और संसद की मंजूरी के बाद 1962 के पुराने नियमों की जगह ले सकते हैं।
यदि ये नियम अंतिम रूप में लागू होते हैं, तो इनके 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने की संभावना है। विभाग ने ड्राफ्ट नियमों और फॉर्म्स पर 22 फरवरी 2026 तक फीडबैक मांगा है।
नए इनकम टैक्स रूल्स लाने का उद्देश्य
इनकम टैक्स विभाग के मुताबिक, नए नियमों का मकसद टैक्स कंप्लायंस को आसान बनाना और करदाताओं के अनुभव को बेहतर करना है। नियमों की भाषा को पहले से अधिक सरल और स्पष्ट बनाया गया है।
जहां जरूरत थी, वहां फॉर्मूले, टेबल और संरचित नियम जोड़े गए हैं। पुराने और गैर-जरूरी प्रावधानों को हटाकर टैक्स सिस्टम को ज्यादा व्यावहारिक बनाने की कोशिश की गई है।
साथ ही, टैक्स फॉर्म्स को भी सरल किया गया है। आने वाले समय में स्मार्ट और टेक्नोलॉजी-आधारित फॉर्म्स पेश किए जाएंगे, जिनमें प्री-फिल्ड डेटा और ऑटोमैटिक रिकॉन्सिलिएशन जैसी सुविधाएं होंगी।
रूल 57: संपत्तियों की वैल्यू तय करने का नया तरीका
ड्राफ्ट नियमों में शामिल रूल 57 सबसे अहम प्रावधानों में से एक है, जिसमें ज्वेलरी, कलात्मक वस्तुओं और अचल संपत्ति की फेयर मार्केट वैल्यू (FMV) तय करने का तरीका बताया गया है।
ज्वेलरी और कलाकृतियों की वैल्यू
नए नियमों के अनुसार, ज्वेलरी या कलात्मक वस्तुओं की वैल्यू वह मानी जाएगी जो वे वैल्यूएशन डेट पर खुले बाजार में बिकने पर प्राप्त कर सकती हैं।
- यदि ज्वेलरी या आर्टवर्क रजिस्टर्ड डीलर से खरीदा गया है, तो उसकी इनवॉइस वैल्यू को ही मान्य माना जाएगा।
- अगर यह संपत्ति किसी अन्य तरीके से प्राप्त हुई है और उसकी कीमत ₹50,000 से अधिक है, तो रजिस्टर्ड वैल्यूअर की रिपोर्ट ली जा सकती है।
इस श्रेणी में पेंटिंग, मूर्तियां, ड्रॉइंग, पुरावशेष और अन्य कलात्मक वस्तुएं शामिल हैं।
जमीन और भवन की वैल्यू कैसे तय होगी
भूमि या भवन जैसी अचल संपत्ति के मामले में, उसकी फेयर मार्केट वैल्यू वही मानी जाएगी जो स्टांप ड्यूटी के लिए सरकारी प्राधिकरण द्वारा तय या आंकी गई हो। इससे टैक्स वैल्यूएशन और स्टांप ड्यूटी वैल्यू के बीच अंतर की समस्या कम होगी।
अन्य संपत्तियों का मूल्यांकन
ऊपर बताई गई श्रेणियों के अलावा आने वाली संपत्तियों के लिए, खुले बाजार में सामान्य तौर पर मिलने वाली कीमत को आधार बनाया जाएगा।
ड्राफ्ट रूल्स 2026 के तहत वैल्यूएशन का सार
- ज्वेलरी: ओपन मार्केट वैल्यू या रजिस्टर्ड डीलर की इनवॉइस वैल्यू
- कलात्मक वस्तुएं: बाजार मूल्य या इनवॉइस; ₹50,000 से ऊपर होने पर वैल्यूअर रिपोर्ट
- अचल संपत्ति: स्टांप ड्यूटी वैल्यू
- अन्य संपत्तियां: खुले बाजार में मिलने वाली सामान्य कीमत
करदाताओं पर क्या होगा असर?
नए वैल्यूएशन नियमों से टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता और स्पष्टता बढ़ेगी। इससे विवाद कम होंगे, कैपिटल गेन और वेल्थ रिपोर्टिंग आसान होगी और टैक्स फाइलिंग अधिक व्यवस्थित बनेगी।
एक बार लागू होने के बाद, इनकम टैक्स रूल्स 2026 करदाताओं के लिए अधिक सरल, डिजिटल और भरोसेमंद टैक्स ढांचा तैयार करेंगे।






