फेसबुक, वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम से लेकर गेमिंग तक… क्या ऑनलाइन दुनिया में बच्चे सुरक्षित हैं? यूनिसेफ की रिपोर्ट ने माता-पिता के बीच बढ़ाई चिंता

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दुनिया भर में इंटरनेट और सोशल मीडिया के तेज़ी से फैलने से बच्चों की सुरक्षा की एक डरावनी और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यूनाइटेड नेशंस चिल्ड्रन्स फंड (UNICEF) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल दुनिया भर में लगभग 20 मिलियन बच्चों ने किसी न किसी तरह से ऑनलाइन यौन शोषण और गलत व्यवहार का सामना किया है। UNICEF के जारी आंकड़ों के मुताबिक, 12 से 17 साल की उम्र के लगभग 1.5 मिलियन बच्चे बिना मर्ज़ी के और पोर्नोग्राफ़िक कंटेंट के संपर्क में आए हैं। इस बीच, 9 मिलियन से ज़्यादा बच्चों पर ऑनलाइन यौन बातचीत में हिस्सा लेने का दबाव डाला गया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि असली आंकड़ा इससे कहीं ज़्यादा हो सकता है।

पांच में से एक बच्चा शिकार
UNICEF की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर लगभग 60 प्रतिशत गलत व्यवहार और शोषण सोशल मीडिया ऐप (जैसे Facebook, WhatsApp, Instagram, Snapchat और TikTok) पर हुआ। इसके अलावा, 14 प्रतिशत मामले ऑनलाइन गेमिंग ऐप के ज़रिए हुए। रिसर्च में पाया गया कि अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और पूर्वी यूरोप के 21 देशों में 12 से 17 साल के हर पांच में से एक बच्चे (21% से ज़्यादा) ने कम से कम एक बार ऑनलाइन सेक्सुअल हैरेसमेंट का अनुभव किया है।

अजनबियों के बजाय अपनों से खतरा
रिपोर्ट की सबसे खास बात यह है कि आधे से ज़्यादा (50% से ज़्यादा) अब्यूज़ के मामलों में, पीड़ित किसी ऐसे व्यक्ति के शिकार थे जिसे वे पहले से जानते थे। इसमें दोस्त, रिश्तेदार या ऑनलाइन पार्टनर शामिल थे। 38 परसेंट मामलों में, बच्चे किसी अजनबी के अब्यूज़ का सबसे पहले शिकार हुए।

21 देशों में 21,000 बच्चों का सर्वे
यह रिपोर्ट 2020 और 2025 के बीच ब्राज़ील, पाकिस्तान, केन्या, सर्बिया और दूसरे पूर्वी यूरोपीय और एशियाई देशों सहित 21 देशों में 21,000 इंटरनेट यूज़र्स (बच्चों) की स्टडी पर आधारित है। हालांकि, भारत को सर्वे में शामिल नहीं किया गया था।

मेटा की सफाई
इस मामले पर रिएक्शन देते हुए, फेसबुक, वॉट्सऐप और इंस्टाग्राम की पेरेंट कंपनी मेटा के एक स्पोक्सपर्सन ने कहा कि यह सर्वे उन सालों के डेटा पर आधारित था जब टीनएजर्स के लिए ऑटोमैटिक प्राइवेट अकाउंट और अनजान एडल्ट्स के मैसेज ब्लॉक करने जैसे सेफ्टी फीचर्स पूरी तरह से लागू नहीं थे। कंपनी ने अब बच्चों की सुरक्षा के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं।

AI एक नया खतरा बन गया है
यूनिसेफ ने भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के गलत इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंता जताई है। 9 देशों से इकट्ठा किए गए डेटा के एनालिसिस के मुताबिक, लगभग 1.1 मिलियन बच्चों ने AI से बनी पोर्नोग्राफिक या आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो देखने की बात मानी है। इससे बच्चों में मेंटल स्ट्रेस और एंग्जायटी का लेवल काफी बढ़ गया है।